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पंजाब में दलबदल पर घमासान, राष्ट्रपति तक पहुंची,आप ने हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में दलबदल के मुद्दे को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा, वहीं भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने आप सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग और बदले की राजनीति के आरोप लगाए हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर दलबदल के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की। इस दौरान उनके साथ कई विधायक और मंत्री दिल्ली पहुंचे, हालांकि राष्ट्रपति से मिलने की अनुमति केवल मुख्यमंत्री को ही दी गई। मुलाकात से पहले मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि जिन राज्यसभा सदस्यों को पार्टी ने चुना, उन्होंने बाद में पार्टी छोड़कर अन्य दलों का रुख किया, जो जनता के विश्वास के साथ धोखा है।

मंत्री बलबीर सिंह ने भी इस मुद्दे को नैतिकता और जनादेश से जुड़ा बताते हुए कहा कि अगर राष्ट्रपति अन्य दलों के नेताओं से मिल सकती हैं, तो आप के प्रतिनिधियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी के 95 विधायक एकजुट हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए हैं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह उन राज्यों में अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता हासिल करने की कोशिश करती है, जहां जनता ने उसे नकार दिया है।

मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि सभी विधायकों के लिए समय मांगा गया था, लेकिन अनुमति सीमित रही। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व के प्रति एकजुटता कायम है और तीन करोड़ पंजाबियों की भावनाओं को राष्ट्रपति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। मंत्री संजीव अरोड़ा ने भी कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

दूसरी ओर, भाजपा नेता राघव चड्ढा ने आप सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पंजाब सरकार राज्य मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है और विरोध करने वालों को निशाना बना रही है। उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात कर कहा कि जब दो-तिहाई सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया, तब उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर भी आप पर ‘बदले की राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अब एक आहत संगठन की तरह व्यवहार कर रही है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब पुलिस और सरकारी एजेंसियों का इस तरह इस्तेमाल खतरनाक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव संभव हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की सियासत को नई दिशा दे दी है, जहां दलबदल का मुद्दा अब संवैधानिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

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