नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कपास क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी” को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 5,659.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह मिशन 2026–27 से 2030–31 तक लागू रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य कपास उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और भारत को वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि
यह मिशन सरकार के “5 एफ विजन” (फार्म से फाइबर से फैक्टरी से फैशन से फौरेन) के तहत काम करेगा। इसके जरिए उच्च उत्पादन वाली, कीट और बीमारियों से सुरक्षित तथा जलवायु अनुकूल बीज विकसित किए जाएंगे। साथ ही हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम और आधुनिक खेती तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाले और कीट-रोधी बीजों का विकास, आधुनिक खेती तकनीकों का विस्तार, कपास की गुणवत्ता सुधारने के लिए जीनिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों का आधुनिकीकरण के साथ देशभर में आधुनिक टेस्टिंग लैब की स्थापना किया जाएगा। इसके साथ ”कस्तूरी कॉटन भारत“ के तहत ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ किसानों को डिजिटल मंडियों से जोड़कर बेहतर कीमत दिलाया जाएगा। फ्लैक्स, बांस, केला जैसे प्राकृतिक फाइबर को भी प्रोत्साहन
मिलेगा जिसके लिए कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय मिलकर लागू करेंगे। इसमें आईसीएआर और सीएसआईआर जैसे संस्थानों की भी भागीदारी होगी।
वैष्णव ने बताया कि इस मिशन के तहत शुरुआत में 14 राज्यों के 140 जिलों और करीब 2000 जीनिंग एवं प्रोसेसिंग इकाइयों को शामिल किया जाएगा। इस योजना से लगभग 32 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य 2031 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ करना और उत्पादकता 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है।
केंद्र ने मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी को मंजूरी दी, कपास क्षेत्र को मिलेगी मजबूती
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