मुडिला शिवदत्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की रात में कथा व्यास स्वामी उत्तम कृष्ण शास्त्री ने भक्तों को नारद जी के पूर्व चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि भगवान की सच्ची भक्ति से ही व्यक्ति को सम्मान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि महर्षि नारद ने वेदव्यास जी के असंतोष को दूर करने के लिए अपना पूर्व जन्म का प्रसंग सुनाया था। उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म में वे एक दासी पुत्र थे, लेकिन भगवान नारायण की भक्ति करते-करते ब्रह्मा जी के मानस पुत्र बने। आज संसार में जो उनका सम्मान और पूजा हो रही है, वह केवल भक्ति का प्रभाव है। उन्होंने सुखदेव जी के दिव्य जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को अमरनाथ गुफा में अमर कथा सुनाई थी, जिसके प्रभाव से सुखदेव जी का प्राकट्य हुआ। आगे उन्होंने राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि कलयुग के प्रभाव में आकर परीक्षित जी ने एक संत का अपमान कर दिया था। इससे क्रोधित होकर संत पुत्र श्रृंगी ऋषि ने उन्हें सातवें दिन तक्षक नाग के डसने का श्राप दे दिया। महाराज जी ने कहा कि बाद में संत समाज ने राजा परीक्षित के कल्याण के लिए गंगा तट स्थित सुखताल में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया, जहां सुखदेव जी ने परीक्षित को कथा श्रवण कराकर उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से व्यक्ति को भक्ति और मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। कथा में मुख्य यजमान राज मंगल मिश्र रहे। आयोजन में नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा मिश्रा, विकास जायसवाल, महामंत्री अनिल जायसवाल, शंभूनाथ सोनी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बलराम मिश्रा, सहजराम यादव, पुजारी वर्मा, कल्लू सेठ, अनुज, मनीष यादव, रामनरेश यादव और अनिल मौर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
‘भक्ति से ही मिलता है सम्मान और मोक्ष’:मुडिला शिवदत्य के भागवत कथा में नारद जी के पूर्व जन्म और परीक्षित प्रसंग का किया भावपूर्ण वर्णन
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