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आदिवासी समाज ने गोंड जाति प्रमाण पत्रों की जांच मांगी:श्रावस्ती से लखनऊ पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, उच्च स्तरीय जांच की मांग


मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था के तत्वावधान में श्रावस्ती सहित उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के कई जिलों से आदिवासी समाज के लोग लखनऊ पहुंचे। उन्होंने गोंड (GOND) जाति के प्रमाण पत्रों की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से सौंपा। यह ज्ञापन संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बहादुर चौधरी ने प्रस्तुत किया। ज्ञापन में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के कई जनपदों में, जिनमें श्रावस्ती, बस्ती और सिद्धार्थनगर अन्य जिले हैं, गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है। संस्था ने आरोप लगाया है कि कुछ अन्य वर्गों के लोग अपने उपनाम ‘गोंड’ का उपयोग कर या अन्य तरीकों से कथित तौर पर गलत जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इन फर्जी प्रमाण पत्रों के माध्यम से वे अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। संस्था का कहना है कि इससे वास्तविक आदिवासी जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है और यह नियम विरुद्ध है। संस्था ने मांग की है कि जिन जनपदों में ऐसे प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। इसके अतिरिक्त, गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाने वालों और ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने वाले दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। संस्था ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

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