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सिद्धार्थनगर की 6 पंचायतों में करोड़ों घोटाले की जांच शुरू:तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, डीएम ने दिए जांच के निर्देश


सिद्धार्थनगर के नौगढ़ और शोहरतगढ़ विकासखंड की छह ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपए के कथित वित्तीय घोटाले की जांच शुरू हो गई है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर पांच ग्राम पंचायतों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समितियां गठित की गई हैं। हालांकि जांच शुरू होने से पहले ही इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। नौगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत सेमरियांव, हरदासपुर और रसूलपुर की जांच महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र को सौंपी गई है। वहीं रामगढ़ और रामपुर पंचायत की जांच अधिशासी अभियंता नलकूप खंड करेंगे। इन समितियों में संबंधित बीडीओ और एडीओ पंचायत को भी शामिल किया गया है। हालांकि टेड़िया ग्राम पंचायत की जांच को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। शिकायत के बाद खुला मामला पूरा मामला शिकायतकर्ता अंकित सिंह द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद सामने आया। शिकायत के साथ नोटरी एफिडेविट, भुगतान संबंधी दस्तावेज, वाउचर और कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड भी लगाए गए थे। शिकायत में वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक फर्जी बिल-वाउचर, कागजों पर कार्य दिखाकर भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। स्ट्रीट लाइट और डस्टबिन खरीद में गड़बड़ी का आरोप शिकायत में स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन, आरसीसी बेंच, ईंट सप्लाई और साफ-सफाई कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप है। आरोप के मुताबिक कई पंचायतों में एक स्ट्रीट लाइट के लिए ₹3,871 तक का भुगतान दिखाया गया, जबकि बाजार में वही सामग्री ₹600 से ₹1200 तक उपलब्ध है। कई जगह एक ही कार्य को बार-बार दिखाकर भुगतान लेने और मौके पर कार्य नहीं होने का भी दावा किया गया है। फर्मों की भूमिका भी जांच के दायरे में शिकायत में कुछ फर्मों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन फर्मों ने नौगढ़, शोहरतगढ़, बढ़नी और उसका बाजार समेत कई विकासखंडों में बिना टेंडर भारी मात्रा में सामग्री सप्लाई की। फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान और पंचायत स्तर पर संगठित तरीके से सरकारी धन निकासी के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच की निष्पक्षता पर सवाल जांच समिति में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को शामिल किए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, एडीओ पंचायत और बीडीओ पर ही मिलीभगत के आरोप हैं, तो उसी विभाग के अधिकारियों को जांच में शामिल करना पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। गौरतलब है कि शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन कई दिनों तक जिला पंचायती राज विभाग स्तर पर कोई सक्रियता नहीं दिखाई दी। ग्रामीणों ने की तकनीकी जांच की मांग ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे। मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए, भुगतान और बिलों की तकनीकी जांच हो तथा संबंधित फर्मों के बैंकिंग और जीएसटी लेनदेन की भी पड़ताल की जाए।

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