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बकरीद:  सीएम के सख्त रख से नरम पड़े मौलाना, कुर्बानी को लेकर दिए ये निर्देश

लखनऊबकरीद त्यौहार को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख से मौलाना और इस्लामिक विद्वान नरम पड़ गये है। सरकार द्वारा इस खास मौके पर नमाज से लेकर कुर्बानी तक दिये गये निर्देशों को सही बताकर लोगो से अपील करने लगे हैं। उनका तर्क है जिसे लेकर कानूनी प्रतिबंध हो उसे सभी को मानना चाहिए।

बकरीद (ईद-उल-अधा) कल यानी गुरुवार को पूरे देश में मनायी जायेगी। इसे लेकर मौलानाओं और इस्लामिक विद्वानों की राय अब लगभग एक हो गयी है। अशफाक उल्ला खान उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी लखनऊ महानगर अल्पसंख्यक मोर्चा एवं धर्मगुरु ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमाज को सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर जो सख्ती बरती है वह जायज है जिसका मैं समर्थन करता हूं क्योंकि सड़क अपवित्र होती है सड़क पर कुत्ता,सूअर और बहुत सारे जानवर चलते हैं और वह सड़क पर मल मूत्र भी करते हैं ।  

नमाज हमेशा पाक जगह पर होती है , इसकी  पहली शर्त यह है कि नमाज पढ़ने वाला व्यक्ति और स्थान पाक होना चाहिए । सड़क परिवहन के लिए है और मस्जिद नमाज के पढ़ने के लिए होती है। धार्मिक गुरु मुशीर अहमद ने कहा कि यह बकरीद मुख्य रूप से शांति, आपसी भाईचारे और देश के कानूनों के पालन पर केंद्रित है। त्योहार पर किसी भी ऐसे जानवर की कुबार्नी नहीं देनी चाहिए जिस पर कानूनी प्रतिबंध हो।

कुबार्नी या नमाज हो सड़कों और खुले सार्वजनिक स्थानों पर न करके, हमेशा निर्धारित स्थानों या मस्जिदो ईदगाहों के अंदर ही करना चाहिए ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों। मो अजीम ने बताया कि
आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए गाय की कुबार्नी न करने और अन्य वैध जानवरों को चुनने की अपील की है? कुबार्नी का असली मकसद  सिर्फ पशुओं का बलिदान देना नहीं, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों, अहंकार और हिंसा को त्यागना है।

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