HomeHealth & Fitnessयमुना के सीने पर माफियाओं का ‘राज’! जांच टीम का रास्ता रोक...

यमुना के सीने पर माफियाओं का ‘राज’! जांच टीम का रास्ता रोक लौटा दिया बैरंग, कौशाम्बी में अवैध खनन पर बड़ा खुलासा

file_00000000ff507208afa1450724075ddbकौशाम्बी जिले में यमुना नदी के विभिन्न बालू घाटों पर अवैध खनन का खेल बेलगाम होता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब शासन द्वारा भेजी गई जांच टीम तक को माफियाओं ने घाट तक नहीं पहुंचने दिया। मंझनपुर तहसील के कटैया घाट पर हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था, खनन विभाग और बालू माफियाओं के गठजोड़ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।आरोप है कि यमुना नदी की जलधारा के बीचोंबीच पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से खुलेआम बालू निकाला जा रहा है, लेकिन खनन विभाग इस पर प्रभावी रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। शासन स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब विशेष जांच टीम कौशाम्बी पहुंची, तब माफियाओं ने ऐसा दबाव बनाया कि टीम बिना जांच किए ही लौटने को मजबूर हो गई।

डंपर लगाकर रोका रास्ता, घाट तक नहीं पहुंच सकी टीम

सूत्रों के मुताबिक खनन विभाग की टीम कटैया घाट के खंड संख्या 10/19 से 10/21 में अवैध खनन की शिकायत की जांच करने पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही अधिकारी घाट की ओर बढ़े, पहले से खड़े डंपर ट्रकों से रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया।आरोप है कि सत्ता संरक्षित बालू माफिया मनीष ओझा ने अपने लोगों के साथ मिलकर जांच टीम को रोकने की रणनीति बनाई। मनीष ओझा को पट्टा धारक विजय कुमार सिंह का प्रतिनिधि बताया जा रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रास्ता रोके जाने के बाद मनीष ओझा ने अपने करीबी फरीद बाबा समेत कई समर्थकों को मौके पर बुला लिया। देखते ही देखते घाट के आसपास दर्जनों दबंगों का जमावड़ा लग गया। अधिकारियों की गाड़ी को घंटों तक घेरे रखा गया और नारेबाजी व हंगामे के बीच टीम घाट तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार अधिकारियों को बिना जांच किए ही लौटना पड़ा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब शासन की जांच टीम ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

खनन विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जांच टीम के आने और उसके रूट की जानकारी माफियाओं तक कैसे पहुंची? शासन द्वारा भेजी गई टीम की गोपनीयता भंग होना सीधे तौर पर विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन विभाग और बालू माफियाओं के बीच लंबे समय से गहरे संबंध हैं। पूरे दिन खनन कार्यालय में माफियाओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिसका प्रमाण विभाग में लगे सीसीटीवी कैमरे भी दे सकते हैं।बीते दिनों खनन विभाग में होमगार्ड से हुए विवाद और मंझनपुर कोतवाली में दर्ज मुकदमे का मामला भी इसी विवादित माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।

यमुना की जलधारा में लगातार हो रहा खनन

जानकारों का कहना है कि यमुना नदी की सक्रिय जलधारा से मशीनों द्वारा खनन पूरी तरह नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद बुलडोजर, पोकलैंड और जेसीबी मशीनें दिन-रात नदी के भीतर चल रही हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय खतरा बढ़ रहा है, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

विपक्ष हमलावर, प्रशासन मौन

घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि जिले में माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि अधिकारी भी उनके सामने बेबस दिखाई दे रहे हैं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।हालांकि खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। 

सबसे बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कौशाम्बी में बालू माफियाओं को संरक्षण कौन दे रहा है?
क्या प्रशासनिक तंत्र पर माफियाओं का दबदबा हावी हो चुका है?
और क्या शासन की जांच भी अब माफियाओं के प्रभाव से अछूती नहीं रह गई है?

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments