सिद्धार्थनगर के भारतभारी क्षेत्र में मानसून की सक्रियता में देरी के कारण भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप जारी है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, और कूलर-पंखे भी लोगों को राहत नहीं दे पा रहे हैं। मानसून में देरी का सबसे अधिक प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है। धान की खेती के लिए तैयार किसान बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। समय पर वर्षा न होने के कारण धान की नर्सरी सूखने लगी है, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। स्थानीय किसान राजेश कुमार, हरीलाल, शौकत अली और मो. अफसर ने बताया कि मानसून में देरी से धान की नर्सरी को काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई, तो धान की रोपाई में काफी देरी होगी। भीषण गर्मी का असर केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। पशु-पक्षी भी पानी और छाया की तलाश में भटक रहे हैं। तालाबों, पोखरों और छोटे जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे मवेशियों और वन्य जीवों के लिए पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। बारिश के अभाव में नदियाँ, तालाब और नहरें सूखने की कगार पर पहुँच गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। कई स्थानों पर हैंडपंपों का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे स्थानीय लोगों को पानी के लिए अधिक प्रयास करने पड़ रहे हैं। इस बीच, सरयू नगर खंड बांसी के अधिशाषी अधिकारी ने जानकारी दी है कि नहरों में पानी छोड़ने का काम चल रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी नहरों में पर्याप्त पानी पहुंच जाएगा, जिससे किसान अपने खेतों की सिंचाई आसानी से कर सकेंगे। किसानों और आम जनता की निगाहें अब मानसून की पहली अच्छी बारिश पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही वर्षा होगी, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, सूखती धान की नर्सरी को बचाया जा सकेगा और जलस्रोतों में पानी भरने के साथ जनजीवन सामान्य हो सकेगा।
भारत भारी में भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त:मानसून में देरी से सूख रही धान की नर्सरी, बारिश के अभाव में नहर और तालाब हुए बेपानी
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