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परिजनों का ऑपरेशन के समय सर्जन की मौजूदगी पर सवाल:मोबाइल लोकेशन और अस्पताल अभिलेखों की जांच की मांग, CMO ने गठित की कमेटी


सिद्धार्थनगर के इटवा स्थित जनता सेवा अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद नवजात की मौत के मामले में नया विवाद सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के समय नामित सर्जन डॉ. डाली शर्मा अस्पताल में मौजूद नहीं थीं। इस आरोप के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। डुमरियागंज तहसील के सहदेइया गांव निवासी वंदना पत्नी चंद्रमणि को 23 मई को प्रसव के लिए जनता सेवा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि उसी दिन उनका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जांच के क्रम में 30 मई को डॉ. डाली शर्मा ने सीएमओ कार्यालय में अपना लिखित बयान दर्ज कराया। हालांकि, उनके बयान के बाद परिजनों ने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान डॉ. शर्मा अस्पताल में मौजूद नहीं थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में एक पुरुष व्यक्ति पूरी प्रक्रिया को संचालित कर रहा था और वही सर्जन की भूमिका निभा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी डॉ. डाली शर्मा को अस्पताल में नहीं देखा और न ही उन्हें ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई।
CCTV फुटेज और मोबाइल लोकेशन जांच की मांग पीड़ित परिवार ने जांच समिति से अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने और उसकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), अस्पताल के प्रवेश-निकास रजिस्टर, ऑपरेशन रजिस्टर और रेफरल दस्तावेजों की जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। परिजनों का कहना है कि केवल बयान दर्ज करने से निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी गहन जांच की जानी चाहिए। अस्पताल के पंजीकरण और स्टाफ पर भी सवाल जांच के दौरान अस्पताल की पंजीकरण व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि जिन चिकित्सकों और विशेषज्ञों के नाम अस्पताल के अभिलेखों में दर्ज हैं, उनकी वास्तविक उपलब्धता संदिग्ध है। यह भी चर्चा है कि पंजीकरण में दर्शाए गए कुछ चिकित्सक अन्य स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं। ऑपरेशन थिएटर में मौजूद स्टाफ और ओटी टेक्नीशियन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मांग की है कि घटना के समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद सभी व्यक्तियों की पहचान, योग्यता और जिम्मेदारियों की जांच की जाए।
पीड़ित का आरोप- डॉ. प्रवीण यादव कर रहे थे इलाज सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर जांच टीम को दिए गए लिखित बयान में पीड़ित चंद्रमणि ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का इलाज और ऑपरेशन डॉ. प्रवीण यादव द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी उनकी पत्नी का उपचार डॉ. प्रवीण यादव ही करते रहे हैं। चंद्रमणि का आरोप है कि नवजात की हालत बिगड़ने के बाद उसे जनता सेवा अस्पताल से लाइट हॉस्पिटल रेफर किया गया, लेकिन वहां भी कई घंटों तक किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की बजाय केवल स्टाफ के भरोसे रखा गया। उनका कहना है कि समय रहते बेहतर उपचार या उच्च स्तरीय केंद्र पर रेफर किए जाने पर बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल संचालन को लेकर भी गंभीर आरोप पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि जनता सेवा अस्पताल के वास्तविक संचालन में राकेश यादव और प्रमोद कनौजिया की भूमिका है, जबकि दस्तावेजों में अलग-अलग नाम दर्शाए जाते हैं। परिवार ने अस्पताल के वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक नियंत्रण और संचालन व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है। हाईकोर्ट जाने की चेतावनी परिवार ने स्पष्ट कहा है कि मामले में केवल औपचारिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित जांच होनी चाहिए। उन्होंने डॉ. प्रवीण यादव, डॉ. डाली शर्मा, राकेश यादव, प्रमोद कनौजिया, जनता सेवा अस्पताल और लाइट हॉस्पिटल की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही मोबाइल सीडीआर, लोकेशन, अस्पताल अभिलेख, बैंक खातों के विवरण, ऑपरेशन रजिस्टर, रेफरल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग उठाई है। नवजात की मौत मामले की जांच जारी जांच अधिकारी एवं एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. आर.जी. सिंह ने बताया कि नवजात की मौत के मामले में सभी बिंदुओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि परिवार के पास उपलब्ध किसी भी साक्ष्य को जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। जांच निष्पक्ष ढंग से की जा रही है और सभी तथ्यों की गहन पड़ताल की जाएगी।

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