Homeदेश (National)अप्रैल महीने में हर दूसरे दिन आएंगे व्रत-त्योहार, देखिए पूरी लिस्ट

अप्रैल महीने में हर दूसरे दिन आएंगे व्रत-त्योहार, देखिए पूरी लिस्ट

अप्रैल 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से बहुत ही खास होने वाला है क्योंकि इस दौरान देश के लगभग हर हिस्से में कोई न कोई बड़ा उत्सव मनाया जाएगा। गर्मी की दस्तक के साथ ही यह महीना अपने साथ भक्ति, उल्लास और परंपराओं का एक ऐसा संगम लेकर आ रहा है जो पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग देगा। इस महीने में न केवल हिंदू धर्म के बड़े पर्व जैसे हनुमान जन्मोत्सव और अक्षय तृतीया आएंगे, बल्कि बैसाखी, गुड फ्राइडे और ईस्टर जैसे महत्वपूर्ण दिन भी पूरे उत्साह के साथ मनाए जाएंगे।

सितारों की चाल के हिसाब से भी यह समय बहुत शुभ माना जा रहा है क्योंकि सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिससे मांगलिक कार्यों के लिए कई विशेष मुहूर्त बनेंगे। चैत्र पूर्णिमा के पवित्र स्नान से लेकर वैशाख महीने की एकादशी तक, यह पूरा महीना श्रद्धा और आस्था के साथ बीतेगा।

यह भी पढ़ें: ईरान से पारसियों के अनोखे मंदिर में 1300 साल से जल रही आग, इसी की होती है पूजा

अप्रैल 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार

इस महीने में हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने की शुरुआत होगी। इसके साथ ही सिख, बौद्ध और ईसाई समाज के भी कई बड़े त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे। नीचे दी गई जानकारी से आप अपने पूरे महीने की प्लानिंग कर सकते हैं और जान सकते हैं कि कौन सा शुभ दिन किस तारीख को पड़ रहा है।

हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा (2 अप्रैल)

अप्रैल महीने का पहला बड़ा त्योहार हनुमान जयंती है। इस दिन को बजरंगबली के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। साथ ही इस दिन चैत्र महीने की पूर्णिमा भी है, जिसका हिंदू धर्म में बहुत महत्व है और लोग इस दिन घर में सत्यनारायण भगवान की कथा भी करवाते हैं।

वैशाख महीने की शुरुआत (3 अप्रैल)

हिंदू कैलेंडर के हिसाब से 3 अप्रैल से पावन वैशाख महीने की शुरुआत हो रही है। पुराने ग्रंथों में इस महीने को माधव मास भी कहा गया है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा करना और प्यासे को पानी पिलाना या जल दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है।

गुड फ्राइडे (3 अप्रैल)

इसी दिन ईसाई समाज का पवित्र दिन गुड फ्राइडे भी पड़ रहा है। यह दिन प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है और चर्च में विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।

ईस्टर संडे (5 अप्रैल)

Good Friday के बाद आने वाले पहले रविवार को ईस्टर संडे मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्रभु ईसा मसीह दोबारा जीवीत हुए थे, इसलिए यह दिन खुशी और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी (13 अप्रैल)

वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। समाज में मान-सम्मान और सुख-सौभाग्य पाने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से कन्यादान करने जितना पुण्य मिलता है।

बैसाखी और मेष संक्रांति (14 अप्रैल)

14 अप्रैल का दिन बहुत खास है क्योंकि इस दिन सूर्य देव मेष राशि में जाएंगे। पंजाब और हरियाणा में इस बैसाखी के रुप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार नई फसल कटने की खुशी और घर में आने वाली खुशहाली का प्रतीक है।

डॉ. अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल)

संविधान बनाने वाले डॉ.भीमराव अंबेडकर की जंयती भी इसी दिन मनाई जाएगी। देश के प्रति उनके बड़े योगदान को याद करते हुए पूरे भारत में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

बंगाली नव वर्ष और बोहाग बिहू (15 अप्रैल)

15 अप्रैल को बंगाल में नया साल शुरू होता है जिसे ‘पोहेला बोइशाख’ कहते हैं। वहीं असम में इस दिन से ‘बोहाग बिहू’ का जश्न शुरू होता है, जो वहां का सबसे बड़ा और मुख्य लोक पर्व है।

अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती (19 अप्रैल)

सोना खरीदने और नए काम शुरू करने के लिए अक्षय तृतीय को साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी अच्छा काम कभी खत्म नहीं होता, उसका फल हमेशा मिलता रहता है। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्मदिन भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

गंगा सप्तमी (23 अप्रैल)

धार्मिक कहानियों के अनुसार इस दिन माता गंगा स्वर्ग से उतरकर भगवान शिव की जटाओं में आई थीं, इसलिए इसे गंगा सप्तमी कहते हैं। इस दिन गंगा नदी में नहाने का महत्व बहुत बढ़ जाता है।

सीता नवमी (25 अप्रैल)

माता सीता के धरती पर आने वाले दिन को सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन शादीशुदा महिलाओं के लिए बहुत जरूरी होता है, जो अपने परिवार की सुख-शांति और लंबी उम्र के लिए इस दिन विशेष पूजा-पाठ करती है।

यह भी पढ़ें: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर अपनों को भेजें ये 5 प्यारे मैसेज

मोहिनी एकादशी (27 अप्रैल)

वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब समुद्र मंथन से अमृत निकला था, तो उसकी रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने इसी दिन सुंदर ‘मोहिनी’ रुप धारण किया था।

नरसिंह जयंती (30 अप्रैल)

महीने के आखिरी दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की जयंती मनाई जाएगी। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा जरूर करते हैं और अंत में हमेशा बुराई पर अच्छाई की ही जीत होती है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments