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फर्जी मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट जारी करने का आरोप, पशु चिकित्सा संघ ने अपर मुख्य सचिव से की एफआईआर की मांग

उन्नाव। उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने पशुपालन विभाग में मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए अपर मुख्य सचिव, पशुधन विभाग को विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। संघ ने आरोप लगाया है कि शासनादेश के तहत नामित किए गए पशु चिकित्सकों को आईडी एवं पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि पहले से ड्यूटी मुक्त किए जा चुके पशु चिकित्सकों से ही प्रमाणन कार्य कराया जा रहा है।

संघ के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शासनादेश संख्या-610 दिनांक 17 मार्च 2026 को लगभग ढाई माह तक लागू नहीं किया। बाद में पशु चिकित्सकों को नामित करने संबंधी पत्र जारी किया गया, लेकिन संबंधित चिकित्सकों को आवश्यक लॉगिन आईडी एवं पासवर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं की गई।
शिकायत के बाद जारी हुए नामांकन पत्र, बैक डेट का आरोप
पत्र में दावा किया गया है कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों द्वारा पशु चिकित्सकों के नामांकन की संस्तुति किए जाने के बावजूद आदेश समय पर जारी नहीं किए गए। संघ का आरोप है कि 3 जून 2026 को शिकायत किए जाने के बाद नामांकन पत्र जारी किए गए और उनमें भी बैक डेट का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ड्यूटी से हट चुके चिकित्सकों से जारी हो रहे प्रमाण पत्र
संघ ने आरोप लगाया है कि जिन पशु चिकित्सकों की वधशालाओं में ड्यूटी समाप्त हो चुकी है, उनसे अभी भी मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट जारी कराए जा रहे हैं। पत्र में इसे जालसाजी की श्रेणी का गंभीर मामला बताते हुए कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्रों की वैधता संदिग्ध है और उनकी जांच कराई जानी चाहिए।
फर्जी मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट जारी होने का आरोप
शिकायत पत्र में कहा गया है कि यदि नामित चिकित्सकों को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं तो प्रमाणन कार्य अधिकृत तरीके से नहीं हो सकता। ऐसे में पूर्व में नामित एवं वर्तमान में ड्यूटी मुक्त चिकित्सकों द्वारा जारी किए गए मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट फर्जी की श्रेणी में आ सकते हैं।
एफआईआर दर्ज कराने और कार्रवाई की मांग
उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने अपर मुख्य सचिव से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराकर निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र तथा ड्यूटी मुक्त होने के बाद भी प्रमाणन कार्य करने वाले पशु चिकित्सकों के खिलाफ जालसाजी संबंधी धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए जाएं।
सीबीआई या एसआईटी जांच की भी मांग
संघ ने अपने पत्र में विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि पुराने मामलों की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। संगठन ने कहा है कि वह विभागीय भ्रष्टाचार के मामलों को उठाता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग को और तेज करेगा।

“आईडी-पासवर्ड नहीं, फिर कैसे जारी हुए सर्टिफिकेट?”
संघ का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नए नामित पशु चिकित्सकों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध ही नहीं कराए गए, तब मीट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट किसके अधिकार और लॉगिन से जारी किए गए। संगठन ने इसे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का प्रमुख बिंदु बताया है।

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