HomeHealth & Fitnessआधुनिक स्क्रीनिंग से बढ़ी बच्चों में टीबी की पहचान:डॉ.ए.के. सिंघल

आधुनिक स्क्रीनिंग से बढ़ी बच्चों में टीबी की पहचान:डॉ.ए.के. सिंघल

लखनऊ। बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान,गुणवत्तापूर्ण जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। क्षमतावर्धन,सामुदायिक जागरूकता सहभागिता और स्वास्थ्य संस्थानों को सशक्त बनाने की दिशा में संचालित गतिविधियों में सहयोगी संस्था वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स ( डब्ल्यूएचपी ) तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। ये जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. ए.के. सिंघल ने दी।

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जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि इन्हीं प्रयासों के तहत बाल रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्स एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों सहित 429 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान, जांच प्रक्रिया और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के नवीनतम दिशानिर्देशों पर प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका गुप्ता का विशेष योगदान रहा। उन्होंने इन-पर्सन वर्चुअल सत्रों के माध्यम से बाल रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ नर्सों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया। इसके साथ ही सीएचसी और जिला अस्पताल की स्टाफ नर्सों को गैस्ट्रिक एस्पिरेट प्रक्रिया का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया,जिससे इस प्रक्रिया को लेकर उनकी झिझक कम हुई और आत्मविश्वास बढ़ा।

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सीएमओ डॉ. एन. बी.सिंह ने कहा कि बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और उपचार न केवल संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में सहायक है,बल्कि गंभीर जटिलताओं की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, जिससे कि प्रत्येक संभावित टीबी ग्रसित बच्चे तक समय पर जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाई जा सके।

विशेषज्ञ की राय
डॉ. सारिका गुप्ता ने बताया कि छह वर्ष तक के बच्चों में टीबी की जांच चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि वे पर्याप्त मात्रा में बलगम नहीं निकाल पाते। ऐसे मामलों में गैस्ट्रिक एस्पिरेशन के माध्यम से नमूना लिया जाता है,जिसके लिए विशेष तकनीकी दक्षता और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को गैस्ट्रिक एस्पिरेशन, इंड्यूस्ड स्पुटम सैंपल संग्रहण, टीबी स्क्रीनिंग तथा पीडियाट्रिक टीबी के निदान और उपचार संबंधी प्रक्रियाओं में दक्ष बनाना था, ताकि बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और जांच सुनिश्चित की जा सके।

 
 
 
 
 
 
 
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