नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर अनशनरत सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की और केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। इस दौरान केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाए जाने का सुझाव भी दिया।
सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार 19वें दिन अनशन पर हैं। उनसे मुलाकात के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए, अन्यथा वर्ष 2029 में उसे सत्ता से बाहर होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा पत्र लीक होने, मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों के बावजूद सरकार जवाबदेही तय नहीं कर रही है।
केजरीवाल ने इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद भी सरकार ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली में गड़बड़ियों के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
भारत माता की जय | सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर से LIVE https://t.co/cH9g9qAJcZ
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 16, 2026
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री ऐसा करेंगे, क्योंकि वांगचुक शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकते हैं।
केजरीवाल ने वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भी जंतर-मंतर पर ही शुरू हुआ था और उसके तीन वर्ष बाद तत्कालीन सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। यदि सरकार युवाओं की आवाज नहीं सुनेगी तो तीन साल बाद उसे भी इसी तरह के राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।












