विकास खंड गिलौला परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए सरकारी आवास उपेक्षा का शिकार हैं। ब्लॉक परिसर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित दो सरकारी आवास पूरी तरह खंडहर में बदल चुके हैं। इन भवनों के चारों ओर घने झाड़-झंखाड़ और पेड़-पौधे उग आए हैं, जिससे पूरा परिसर जंगली क्षेत्र जैसा प्रतीत होता है। लंबे समय से देखरेख और मरम्मत के अभाव में यह सरकारी संपत्ति तेजी से नष्ट हो रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन आवासों का निर्माण कर्मचारियों के रहने के लिए किया गया था, लेकिन ये वर्षों से अनुपयोगी पड़े हैं। रखरखाव की कमी के कारण भवनों की दीवारें जर्जर हो गई हैं, छतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और पूरा परिसर झाड़ियों से घिरा है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं, जिससे इनके ढहने का खतरा बना हुआ है। बरसात के मौसम में इन झाड़ियों के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ब्लॉक परिसर में आने वाले कर्मचारियों और ग्रामीणों को भी इस क्षेत्र के पास जाने में असुरक्षा महसूस होती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो करोड़ों रुपये की यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन खंडहर हो चुके आवासों की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि भवन मरम्मत योग्य पाए जाते हैं, तो उनका जीर्णोद्धार कराया जाए; अन्यथा, उन्हें ध्वस्त कर नए आवासों का निर्माण किया जाए। इसके अतिरिक्त, परिसर में फैले झाड़-झंखाड़ की तत्काल सफाई कराकर पूरे क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की भी मांग की गई है।
ब्लॉक परिसर में सरकारी आवास बने खंडहर:वर्षों से वीरान पड़े, जर्जर भवनों से हादसे का खतरा
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