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दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध,‘जैसा है, जहां है’ आधार पर नियमितीकरण


नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वर्षों से चली आ रही अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। शहरी विकास को गति देने और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर कॉलोनियों के नियमितीकरण के साथ यातायात आधारित विकास (टीओडी) नीति लागू करने की घोषणा की है।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि अब अनधिकृत कॉलोनियों को बिना लेआउट प्लान की स्वीकृति के वैधता प्रदान की जाएगी। इससे मालिकाना हक की प्रक्रिया सरल होगी और लोगों को वर्षों से लंबित समस्याओं से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और अधिकारों के टकराव के कारण नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सभी संबंधित संस्थाओं को एक मंच पर लाकर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

सरकार ने सर्कल रेट की विसंगतियों को भी दूर कर दिया है। पहले दिल्ली सरकार, डीडीए और एलएनडीओ के अलग-अलग सर्किल रेट थे, लेकिन अब एक समान दर लागू कर दी गई है। इससे रजिस्ट्रेशन, कन्वर्जन और लीज होल्ड संपत्तियों से जुड़ी समस्याएं कम होंगी। कन्वर्जन प्रक्रिया को जल्द ही अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 2019 की पीएम-उदय योजना के तहत अब तक लगभग 40 हजार संपत्तियों के हस्तांतरण दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया धीमी थी। नई व्यवस्था के लागू होने से लगभग 50 लाख लोगों और 10 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दिल्ली की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 को इस योजना के तहत नियमित किया जाएगा, जबकि संरक्षित और पर्यावरणीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।

नई प्रणाली के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। 24 अप्रैल 2026 से स्वगम पोर्टल के माध्यम से आवेदन किए जा सकेंगे। समयबद्ध व्यवस्था के तहत जीआईएस सर्वे सात दिनों में, त्रुटि सुधार 15 दिनों में और पूर्ण आवेदन पर 45 दिनों में कन्वेंस डीड जारी की जाएगी।

टीओडी नीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब न्यूनतम प्लॉट साइज घटाकर 2000 वर्ग मीटर कर दिया गया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी। मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को टीओडी जोन माना जाएगा। कुल फ्लोर एरिया रेशियो का 65 प्रतिशत हिस्सा किफायती आवास के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग को लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से न केवल अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि दिल्ली में योजनाबद्ध शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

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