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62वीं वाहिनी ने सीमावर्ती गांव में लगाया शिविर:पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, जरूरतमंदों की सर्जरी और मुफ्त दवा वितरण, पोषण-टीकाकरण की भी दी जानकारी


श्रावस्ती के सिरसिया ब्लॉक स्थित सीमावर्ती गांव टंगफसरी में 62वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की ओर से निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के पशुपालकों को उनके गांव में ही पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रहा। शिविर का आयोजन 62वीं वाहिनी के कमांडेंट अमरेन्द्र कुमार वरुण के निर्देशन में समवाय सोनपथरी के अंतर्गत किया गया। 37 पशुपालकों के 108 पशुओं की जांच शिविर में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इमरान खान और एसएसबी की पशु चिकित्सा टीम ने ग्रामीणों के पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान 37 पशुपालकों के कुल 108 पशुओं की निःशुल्क जांच की गई। पशुओं की स्थिति और उनमें पाई गई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर पशुपालकों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरत के अनुसार की गई सर्जरी जांच के दौरान जिन पशुओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने आई, उनका आवश्यकतानुसार उपचार किया गया। जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी की गई। पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही पशु चिकित्सा सुविधा का लाभ मिला। पोषण और टीकाकरण पर किया जागरूक पशु चिकित्सा टीम ने पशुपालकों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित पोषण और नियमित टीकाकरण के महत्व के बारे में बताया। ग्रामीणों को विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपाय समझाए गए। टीम ने सलाह दी कि पशुओं में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय जल्द चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। पशुधन की सेहत पर जोर अधिकारियों ने कहा कि पशुधन ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में पशुओं की नियमित देखभाल, साफ-सफाई, उचित खानपान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। शिविर के माध्यम से पशुपालकों को इन पहलुओं के प्रति जागरूक करने के साथ उनके पशुओं की स्वास्थ्य जांच भी की गई। गांव के पास सुविधा मिलने से ग्रामीणों को राहत एसएसबी अधिकारियों के अनुसार सीमावर्ती गांवों में इस तरह के शिविर लगाने का उद्देश्य ग्रामीणों और पशुपालकों को उनके घर के नजदीक आवश्यक पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे उन्हें पशुओं के उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और समय व खर्च दोनों की बचत होगी। 62वीं वाहिनी ने सीमावर्ती ग्रामीणों के साथ निरंतर संपर्क और सहयोग बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसी जनकल्याणकारी गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया है।

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