नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के बढ़ते कद को रेखांकित करते हुए एक बड़ी खबर सामने आई है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की इस वर्ष भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ सकते हैं. इस महत्वपूर्ण संभावित दौरे की आधिकारिक पुष्टि भारत में यूक्रेन के राजदूत ऑलेक्ज़ेंडर पोलिशचुक ने की है. रविवार को राजकोट में आयोजित 'वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन' के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए राजदूत पोलिशचुक ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक वे नई दिल्ली पहुंचेंगे. राजदूत ने जोर देकर कहा कि इस दौरे का मुख्य केंद्र बिंदु भारत और यूक्रेन के बीच संयुक्त परियोजनाओं और द्विपक्षीय सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाना होगा. यूक्रेन के राजदूत ने वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन को एक बेहतरीन मंच बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम व्यापारिक परियोजनाओं और आपसी सहयोग पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर है और जेलेंस्की की यात्रा के दौरान उन सभी संभावनाओं पर मुहर लगेगी जो दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं.
पत्रकारिता की गहरी विश्लेषण शैली में देखें तो यह दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब दुनिया भर की नजरें रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान और उसमें भारत की मध्यस्थता की भूमिका पर टिकी हैं. भारत और यूक्रेन के बीच बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, उन्नत तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और राजनयिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि जेलेंस्की की यह यात्रा रक्षा और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में भी नए दरवाजे खोल सकती है. पिछले कुछ महीनों में भारत और यूक्रेन के बीच राजनयिक संपर्क काफी तेज हुए हैं, और इस उच्च स्तरीय दौरे से इन संबंधों को एक औपचारिक और मजबूत आधार मिलने की संभावना है. राजदूत पोलिशचुक ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति जेलेंस्की न केवल दिल्ली में आधिकारिक वार्ता करेंगे, बल्कि वे भारत और यूक्रेन में एक साथ संचालित किए जा सकने वाले रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर भी गहन मंथन करेंगे.
वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में न केवल यूक्रेन बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों ने भी भारत के साथ अपने प्रगाढ़ होते आर्थिक रिश्तों को प्रदर्शित किया. इसी क्रम में रवांडा की भारत में राजदूत जैकलिन मुकांगिरा ने भी भारत और रवांडा के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और बढ़ते आर्थिक सहयोग पर प्रकाश डाला. उन्होंने गर्व से उल्लेख किया कि भारत वर्तमान में रवांडा में दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है. मुकांगिरा ने इस सम्मेलन को साझेदारी निर्माण के लिए एक मूल्यवान मंच बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच कई समानताएं हैं जो उन्हें एक-दूसरे का स्वाभाविक सहयोगी बनाती हैं. इस सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, रवांडा और यूक्रेन जैसे देश भागीदार देशों के रूप में शामिल हुए हैं, जो भारत की वैश्विक निवेश अपील को और अधिक मजबूती प्रदान करते हैं.
इस सम्मेलन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं रविवार को राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के लिए इस वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, यह दो दिवसीय सम्मेलन 11 और 12 जनवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें मुख्य रूप से गुजरात के 12 जिलों के औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य पश्चिमी गुजरात में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देना है. इसमें शामिल प्रमुख क्षेत्रों में सिरेमिक, इंजीनियरिंग, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स, मत्स्य पालन, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र, स्टार्टअप और एमएसएमई जैसे क्षेत्र शामिल हैं. यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय विकास का एक ऐसा अनूठा संगम बनकर उभरा है जहां एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति की यात्रा की नींव रखी जा रही है, तो दूसरी तरफ स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी हो रही है.
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रपति जेलेंस्की की संभावित भारत यात्रा न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भारत ने हमेशा से ही शांति और संवाद का समर्थन किया है, ऐसे में जेलेंस्की का भारत आना दुनिया को एक बड़ा संदेश दे सकता है. कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में भारतीय कंपनियों की भूमिका जैसे विषयों पर ठोस समझौते कर सकते हैं. राजदूत पोलिशचुक की बातों से यह साफ झलकता है कि यूक्रेन भारत को एक विश्वसनीय और शक्तिशाली साझेदार के रूप में देखता है जो न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है. आने वाले महीनों में इस दौरे की आधिकारिक तिथियों और एजेंडे को लेकर दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच कई दौर की वार्ताएं अपेक्षित हैं.
वाइब्रेंट गुजरात के इस मंच से शुरू हुई यह चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है. प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में विभिन्न देशों के राजदूतों का इस तरह से अपनी प्रतिबद्धता जताना यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक केंद्रीय केंद्र बन चुका है. राजकोट में हो रहा यह क्षेत्रीय सम्मेलन केवल सौराष्ट्र और कच्छ के विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने जेलेंस्की की संभावित यात्रा की घोषणा के साथ एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप धारण कर लिया है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति की यह यात्रा दोनों देशों के बीच के समीकरणों को किस तरह नया मोड़ देती है और भारत की विकास गाथा में यूक्रेन के साथ मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.






























