श्रावस्ती के जमुनहा ब्लॉक क्षेत्र के नासिरगंज में शुक्रवार को शबे 13 रजबुल मुरज्जब के अवसर पर पहले इमाम हज़रत अली (अ.स.) की विलादत अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर शिया समुदाय ने जनाब परवेज़ रिज़वी के आवास पर एक महफिल का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई। इसके बाद अली नक़वी ,ज़मन रिज़वी, अर्श हैदर, समीर रिज़वी, सकलैन हैदर, अम्मार रिज़वी और ज़ैन सहित अन्य अकीदतमंदों ने मौला अली की शान में कसीदे और मनक़बतें पेश कीं। इन कलामों के ज़रिये मौला अली की बहादुरी, इल्म, सब्र और इंसाफ़ पसंद ज़िंदगी पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि 13 रजबुल मुरज्जब का दिन इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन खाना-ए-काबा में मौला अली (अ.स.) का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी सत्य और न्याय के लिए समर्पित की और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। उनकी शख़्सियत केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम के अंत में देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। महफिल का माहौल रूहानियत और अकीदत से भरा रहा। मौजूद लोगों ने कहा कि मौला अली की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा दिखा रही हैं।









































