बलरामपुर में प्रशासन ने रविवार को संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। उदईपुर गांव के कोल्हुआ स्थित जंगल क्षेत्र में बनी 50 साल से अधिक पुरानी एक मजार को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। यह कार्रवाई वन विभाग की शिकायत पर देहात कोतवाली पुलिस के सहयोग से की गई। प्रशासन का कहना है कि संबंधित मजार संरक्षित वन क्षेत्र की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित थी। मामले की जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद इसे अनाधिकृत घोषित किया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। क्षेत्राधिकारी नगर ज्योतिश्री ने बताया कि मजार वर्षों पूर्व वन भूमि पर कब्जा कर बनाई गई थी। सभी तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की गहन जांच के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह के विरोध की स्थिति में कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से निर्मित मजारों और अन्य संरचनाओं की जांच की जा रही है। भूमि स्वामित्व की पुष्टि के बाद जहां भी सरकारी या वन भूमि पर अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर आस्था के नाम पर निर्माण करना कानूनन अपराध है और इस तरह का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
बलरामपुर में 50 साल पुरानी मजार पर चला बुलडोजर:संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर प्रशासन ने की कार्रवाई, पुलिस बल तैनात
बलरामपुर में प्रशासन ने रविवार को संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। उदईपुर गांव के कोल्हुआ स्थित जंगल क्षेत्र में बनी 50 साल से अधिक पुरानी एक मजार को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। यह कार्रवाई वन विभाग की शिकायत पर देहात कोतवाली पुलिस के सहयोग से की गई। प्रशासन का कहना है कि संबंधित मजार संरक्षित वन क्षेत्र की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित थी। मामले की जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद इसे अनाधिकृत घोषित किया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। क्षेत्राधिकारी नगर ज्योतिश्री ने बताया कि मजार वर्षों पूर्व वन भूमि पर कब्जा कर बनाई गई थी। सभी तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की गहन जांच के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह के विरोध की स्थिति में कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से निर्मित मजारों और अन्य संरचनाओं की जांच की जा रही है। भूमि स्वामित्व की पुष्टि के बाद जहां भी सरकारी या वन भूमि पर अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर आस्था के नाम पर निर्माण करना कानूनन अपराध है और इस तरह का अभियान आगे भी जारी रहेगा।









































