मद्दोंघाट में मंगलवार को एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाना था। इसमें राजकुमार गुप्ता, शैलेन्द्र जी, विजय गुप्ता पिंकू सिंह, राजन पाल, बहरौची गुप्ता, रधेश्याम गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि सुभाष जी क्ष और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दू समाज की एकता ही देश की मजबूती का आधार है। उन्होंने युवाओं से सनातन संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने शिक्षा, संस्कार, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में हिन्दू समाज के योगदान पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में धर्म रक्षा, गौ सेवा, सामाजिक समरसता और नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन के अंत में सर्वसम्मति से समाज को संगठित रखने, धार्मिक सौहार्द बनाए रखने और राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।
मद्दोंघाट में हिन्दू सम्मेलन संपन्न:समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा पर जोर
मद्दोंघाट में मंगलवार को एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाना था। इसमें राजकुमार गुप्ता, शैलेन्द्र जी, विजय गुप्ता पिंकू सिंह, राजन पाल, बहरौची गुप्ता, रधेश्याम गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि सुभाष जी क्ष और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दू समाज की एकता ही देश की मजबूती का आधार है। उन्होंने युवाओं से सनातन संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने शिक्षा, संस्कार, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में हिन्दू समाज के योगदान पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में धर्म रक्षा, गौ सेवा, सामाजिक समरसता और नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन के अंत में सर्वसम्मति से समाज को संगठित रखने, धार्मिक सौहार्द बनाए रखने और राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।









































