बलरामपुर के रमना पार्क स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को एक हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता महाराजा बलरामपुर जयेंद्र प्रताप सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमज्जगतगुरु स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व वैदिक धर्म संघ, अयोध्या धाम) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए बजरंग दल के प्रांत संयोजक महेश तिवारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को आत्मचिंतन का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली अतीत को समझना और भविष्य में इसे हिंदू राष्ट्र व विश्व गुरु बनाने में अपनी भूमिका तय करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज निर्माण के लिए छोटे-छोटे प्रयासों को आवश्यक बताया। तिवारी ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक आक्रमणों के बावजूद वीर नायकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किए। उन्होंने गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, वीर बंदा बैरागी और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों को सच्चा नायक बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने पंच परिवर्तन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक एकता और अनुशासन पर विशेष बल दिया। मुख्य वक्ता स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज ने हिंदू जनमानस को जागृत होने का आह्वान किया। उन्होंने रामायण काल के प्रसंगों के माध्यम से कैकेयी, शबरी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग, सेवा और आदर्शों को रेखांकित किया। उन्होंने हिंदू समाज से मतभेद भुलाकर संगठित होने और कुटुंब को केंद्र में रखकर समाज को सशक्त बनाने की बात कही। स्वामी प्रपन्नाचार्य ने पंच परिवर्तन अपनाने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस मानवता का संविधान है, जो संपूर्ण समाज को कल्याण का मार्ग दिखाता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन नीलमणि ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू जनमानस उपस्थित रहा।
बलरामपुर में हिंदू सम्मेलन, राष्ट्रबोध का संदेश गूंजा:स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य और महेश तिवारी ने समाज को किया संबोधित
बलरामपुर के रमना पार्क स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को एक हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता महाराजा बलरामपुर जयेंद्र प्रताप सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमज्जगतगुरु स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व वैदिक धर्म संघ, अयोध्या धाम) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए बजरंग दल के प्रांत संयोजक महेश तिवारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को आत्मचिंतन का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली अतीत को समझना और भविष्य में इसे हिंदू राष्ट्र व विश्व गुरु बनाने में अपनी भूमिका तय करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज निर्माण के लिए छोटे-छोटे प्रयासों को आवश्यक बताया। तिवारी ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक आक्रमणों के बावजूद वीर नायकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किए। उन्होंने गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, वीर बंदा बैरागी और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों को सच्चा नायक बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने पंच परिवर्तन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक एकता और अनुशासन पर विशेष बल दिया। मुख्य वक्ता स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज ने हिंदू जनमानस को जागृत होने का आह्वान किया। उन्होंने रामायण काल के प्रसंगों के माध्यम से कैकेयी, शबरी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग, सेवा और आदर्शों को रेखांकित किया। उन्होंने हिंदू समाज से मतभेद भुलाकर संगठित होने और कुटुंब को केंद्र में रखकर समाज को सशक्त बनाने की बात कही। स्वामी प्रपन्नाचार्य ने पंच परिवर्तन अपनाने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस मानवता का संविधान है, जो संपूर्ण समाज को कल्याण का मार्ग दिखाता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन नीलमणि ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू जनमानस उपस्थित रहा।






































