नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। हड्डी रोग, बाल रोग सहित कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी मरीजों को 50 किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने से मरीजों को रेफर करने का सिलसिला रुकेगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल पाएगा। बढ़नी पीएचसी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज ओपीडी के लिए पहुंचते हैं। यह स्वास्थ्य केंद्र नेपाल सीमा से सटा होने के कारण नेपाल राष्ट्र से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। हालांकि, इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की कमी है। नेपाल के साथ-साथ हजारों गांवों के लोग भी यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। शोहरतगढ़ के विधायक विनय वर्मा ने बताया कि क्षेत्र की जनता की मांग पर इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बदलने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए जमीन भी चिह्नित हो गई है। उन्होंने अन्य चिकित्सकों की तैनाती सहित अन्य सुविधाओं की मांग की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि बढ़नी पीएचसी अभी सीएचसी में तब्दील नहीं हुई है, लेकिन इसकी प्रक्रिया चल रही है। जमीन चिह्नित हो चुकी है और कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शासन से धन आवंटन होने के बाद भूमि पूजन कर सीएचसी भवन का निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा। पीएचसी के सीएचसी में बदलने पर कई चिकित्सकों की तैनाती होगी और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। स्थानीय निवासियों अजय, राधेश्याम यादव, बाबूलाल, रामसागर, मयंक, आयुष, गुलाब, साधू और जगदीश ने बताया कि पीएचसी में केवल पैथोलॉजी की सुविधा उपलब्ध है। यहां एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांचों की सुविधा नहीं है, जिससे मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
बढ़नी पीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, मरीज रेफर:नेपाल सीमा पर स्थित अस्पताल में 300 मरीज प्रतिदिन परेशान
नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। हड्डी रोग, बाल रोग सहित कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी मरीजों को 50 किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने से मरीजों को रेफर करने का सिलसिला रुकेगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल पाएगा। बढ़नी पीएचसी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज ओपीडी के लिए पहुंचते हैं। यह स्वास्थ्य केंद्र नेपाल सीमा से सटा होने के कारण नेपाल राष्ट्र से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। हालांकि, इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की कमी है। नेपाल के साथ-साथ हजारों गांवों के लोग भी यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। शोहरतगढ़ के विधायक विनय वर्मा ने बताया कि क्षेत्र की जनता की मांग पर इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बदलने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए जमीन भी चिह्नित हो गई है। उन्होंने अन्य चिकित्सकों की तैनाती सहित अन्य सुविधाओं की मांग की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि बढ़नी पीएचसी अभी सीएचसी में तब्दील नहीं हुई है, लेकिन इसकी प्रक्रिया चल रही है। जमीन चिह्नित हो चुकी है और कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शासन से धन आवंटन होने के बाद भूमि पूजन कर सीएचसी भवन का निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा। पीएचसी के सीएचसी में बदलने पर कई चिकित्सकों की तैनाती होगी और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। स्थानीय निवासियों अजय, राधेश्याम यादव, बाबूलाल, रामसागर, मयंक, आयुष, गुलाब, साधू और जगदीश ने बताया कि पीएचसी में केवल पैथोलॉजी की सुविधा उपलब्ध है। यहां एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांचों की सुविधा नहीं है, जिससे मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।









































