पुणे। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसी को देखते हुए भारतीय सेना का लक्ष्य है कि प्रत्येक सैनिक ड्रोन संचालित करने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि सैनिकों और कैडेटों को भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना में ‘ईगल ऑन द आर्म’ की अवधारणा पर काम किया जा रहा है। इसका आशय यह है कि हर सैनिक के हाथ में ड्रोन संचालन की क्षमता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका इतनी बढ़ गई है कि सैनिकों के लिए इसका संचालन और उपयोग समझना अनिवार्य हो गया है।
सेना प्रमुख ने बताया कि सैन्य अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों में ड्रोन प्रशिक्षण की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। कैडेटों को वास्तविक ड्रोन, सिमुलेटर और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिसंबर में एनडीए दौरे के दौरान सेना प्रशिक्षण दल को बड़े ड्रोन और सिमुलेटर उपलब्ध कराए गए थे, जिसके बाद संस्थान में ड्रोन प्रशिक्षण व्यवस्था और मजबूत हुई है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि केवल ड्रोन उड़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सैनिकों को ड्रोन-रोधी तकनीकों की भी जानकारी होनी चाहिए। युद्धक्षेत्र में ड्रोन का व्यापक उपयोग होने के कारण सैनिकों को हवाई खतरों की पहचान और उनसे निपटने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।












