श्रावस्ती के नासिरगंज कस्बे में मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही अकीदतमंदों में शोक का माहौल छा गया। घरों और इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया है। इस अवसर पर महिलाओं ने अपने हाथों की चूड़ियां और गहने उतार दिए। वहीं, अज़ादारों ने काले लिबास पहनकर इमाम हुसैन की शहादत पर शोक व्यक्त किया। इन मजलिसों में इमाम हुसैन और उनके 72 वफ़ादार साथियों की कर्बला में हुई शहादत को याद किया जा रहा है। मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, जिसे अज़ादार गम और कुर्बानी के महीने के रूप में मनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन और उनके साथियों को कई दिनों तक प्यासा रखा गया था। उन्होंने सत्य और इंसानियत की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी इसी महान कुर्बानी की याद में मोहर्रम के दौरान मजलिसें आयोजित की जाती हैं और शोक मनाया जाता है। नासिरगंज कस्बे में मोहर्रम का आगाज़ अकीदत और एहतराम के साथ हुआ है। आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
मोहर्रम का चांद दिखने पर किया अज़ादारों ने शोक व्यक्त:श्रावस्ती के नासिरगंज में मजलिसों का सिलसिला शुरू
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