सिद्धार्थनगर के खुनियाँव क्षेत्र स्थित बिड़रा गांव में मोहर्रम के दसवें दिन आस्था, त्याग और इंसानियत का संदेश पूरे माहौल में दिखाई दिया। कर्बला की याद में आयोजित तकरीर, सबील और दुआ के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। मौलाना ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को अन्याय के खिलाफ संघर्ष और मानवता की रक्षा का प्रतीक बताया। कर्बला की याद में जुटे लोग, श्रद्धा से हुए धार्मिक कार्यक्रम मोहर्रम के दसवें दिन बिड़रा गांव में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह से ही क्षेत्र के लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे। कर्बला के शहीदों को याद करते हुए श्रद्धालुओं ने पूरी गंभीरता और सम्मान के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। तकरीर में बताया गया- कर्बला सिर्फ इतिहास नहीं, इंसानियत की मिसाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना कारी मारूफ हुसैन ने कर्बला के वाकये को विस्तार से बयान किया। उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और इंसानियत की रक्षा का संदेश है।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार ने अन्याय के सामने समझौता नहीं किया और कुर्बानी का रास्ता चुना। अमन-चैन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील मौलाना ने लोगों से समाज में शांति, आपसी सम्मान और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोहर्रम का संदेश लोगों को धैर्य, सहनशीलता और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। सबील के जरिए सेवा और इंसानियत का संदेश तकरीर के समापन के बाद लोगों के बीच सबील का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और राहगीरों को पानी और अन्य पेय वितरित किए गए। लोगों ने इसे सेवा और इंसानियत से जुड़ी परंपरा बताया। दुआ में मांगी गई देश और क्षेत्र की खुशहाली कार्यक्रम के अंत में सामूहिक दुआ की गई। इसमें क्षेत्र की तरक्की, देश में अमन-चैन और समाज में प्रेम और एकता कायम रहने की कामना की गई। लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना आयोजन कार्यक्रम में दोनों समुदायों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। कुतबुद्दीन अंसारी, मोहम्मद फय्याज, अब्दुल अजीज, अनीस अंसारी, मोहम्मद अमीर, मोहम्मद एजाज, अब्दुल वफ़ा, मोहम्मद समीर, मोहम्मद जमील, मोहम्मद शमशेर, मो. नसीम, गुड्डू, मोहम्मद जमाल, मोहम्मद नियाज, शमशुद्दीन और मो. मेहताब आलम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न यह आयोजन मोहर्रम के मूल संदेश—त्याग, धैर्य और मानवता—को मजबूत करता नजर आया।
सिद्धार्थनगर में कर्बला की सीख से गूंजा बिड़रा गांव:मोहर्रम पर तकरीर, सबील और दुआ में दिखी भाईचारे की मिसाल
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