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मनरेगा में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल! कागजों में 113 मजदूर, धरातल पर सन्नाटा

रिपोर्ट – सुशील शर्मा, जिला ब्यूरो चीफ, बस्ती

रुधौली (बस्ती)। जनपद बस्ती के विकासखंड रुधौली अंतर्गत ग्राम पंचायत आमबारी में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में दावा किया गया है कि ग्राम पंचायत में चल रहे विभिन्न मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है।



ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा पोर्टल पर एक दिन में 113 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई है, जबकि वास्तविकता में कई कार्यस्थलों पर मजदूरों की संख्या बेहद कम पाई गई। कई स्थानों पर मात्र चार से पांच मजदूर ही कार्य करते दिखाई दिए, जबकि अभिलेखों में दर्ज संख्या इससे कई गुना अधिक बताई जा रही है।

ग्राम पंचायत में मुड़ाडीहा कला स्थित जयप्रकाश के खेत के उत्तर गड्ढा खुदाई कार्य, गांव के उत्तर पोखरा खुदाई कार्य तथा कृष्ण चंद्र मिश्रा के चक से सत्याराम के चक तक चकमार्ग निर्माण कार्य सहित कई योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थलों की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में भारी अंतर दिखाई दे रहा है।

सबसे गंभीर आरोप मनरेगा पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली तस्वीरों को लेकर लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि एक ही फोटो को कई दिनों तक बार-बार अपलोड किया जा रहा है। कई तस्वीरों में पीछे कोहरा दिखाई देने के कारण ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि पुरानी तस्वीरों का पुनः उपयोग कर कार्य प्रगति और मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई जा रही है। उनका कहना है कि तकनीकी जांच होने पर पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

मनरेगा की निर्धारित मजदूरी 252 रुपये प्रतिदिन के अनुसार 113 मजदूरों का एक दिन का भुगतान 28,476 रुपये बनता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी प्रकार फर्जी मास्टर रोल तैयार कर सरकारी धन के बड़े पैमाने पर भुगतान की तैयारी की जा रही है। आरोप यह भी है कि मजदूरों के खातों में धनराशि भेजने के बाद उससे नकद वापसी का खेल खेला जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, जेई तथा अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि मनरेगा कार्यों में ठेकेदारी प्रथा हावी हो चुकी है और वास्तविक मजदूरों के बजाय कागजों पर ही कार्य कराया जा रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की गंभीरता के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जांच करने से बच रहे हैं। लोगों का कहना है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सर्वेश गुप्ता के प्रभाव के कारण अधिकारी खुलकर कार्रवाई करने से हिचकिचा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर प्रभारी खंड विकास अधिकारी अनिल यादव ने बताया कि शिकायत और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती रही है। ऐसे में आमबारी ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि यदि एक ही फोटो को बार-बार अपलोड कर उपस्थिति और कार्य प्रगति दिखाई जा रही है तथा रिकॉर्ड और वास्तविकता में अंतर है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई कब होगी?यह संस्करण समाचार पत्र, न्यूज़ पोर्टल या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए उपयुक्त है।

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