रिपोर्ट – सुशील शर्मा
रुधौली, बस्ती
जनपद बस्ती के विकासखंड रुधौली अंतर्गत ग्राम पंचायत आमबारी में मनरेगा कार्यों को लेकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार गहराते जा रहे हैं। ग्राम पंचायत में चल रहे विभिन्न मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन के बंदरबांट का मामला अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।



ग्रामीणों और मीडिया टीम द्वारा की गई पड़ताल में सामने आया कि ग्राम पंचायत में कभी 98 मजदूरों तो कभी 122 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि धरातल पर कई कार्यस्थलों पर मजदूर नदारद मिले। कुछ स्थानों पर केवल चार से पांच मजदूर ही कार्य करते दिखाई दिए, जबकि अभिलेखों में दर्ज संख्या इससे कई गुना अधिक बताई जा रही है।
मुड़ाडीहा कला में जयप्रकाश के खेत के उत्तर गड्ढा खुदाई कार्य, गांव के उत्तर पोखरा खुदाई कार्य तथा कृष्ण चंद्र मिश्रा के चक से सत्याराम के चक तक चकमार्ग निर्माण कार्य सहित कई योजनाओं में फर्जी तरीके से मजदूरों की हाजिरी लगाए जाने का आरोप लगाया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मनरेगा पोर्टल पर पुरानी तस्वीरों को दोबारा अपलोड कर कार्य प्रगति दर्शाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई तस्वीरों में पीछे कोहरा साफ दिखाई दे रहा है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि पुराने फोटो का इस्तेमाल कर ऑनलाइन उपस्थिति और कार्य प्रगति दिखाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामले की गंभीरता के बावजूद अधिकारी मौके पर जाने से बच रहे हैं। लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सर्वेश गुप्ता दबंग प्रवृत्ति के हैं, जिसके कारण जिम्मेदार अधिकारी भी खुलकर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
252 रुपये प्रतिदिन मजदूरी के हिसाब से यदि 98 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है तो एक दिन का भुगतान 24,696 रुपये बनता है। वहीं 122 मजदूरों के हिसाब से प्रतिदिन 30,744 रुपये का भुगतान दर्शाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी प्रकार लगातार फर्जी मास्टर रोल तैयार कर लाखों रुपये निकालने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों के खातों में भुगतान भेजने के बाद उनसे रकम वापस लेने का खेल भी चल रहा है। लोगों का कहना है कि पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, जेई और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा कार्यों में ठेकेदारी प्रथा हावी हो चुकी है और वास्तविक मजदूरों के बजाय कागजों पर ही काम कराया जा रहा है।
मामले को लेकर प्रभारी बीडीओ अनिल यादव ने बताया कि शिकायत और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कई शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करते रहे हैं, लेकिन रुधौली क्षेत्र में मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर अब तक ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं में जनता का विश्वास कमजोर होगा।
बड़े सवाल
⚠️ क्या फोटो से फोटो अपलोड कर मनरेगा में किया जा रहा खेल?
⚠️ क्या अधिकारी जांच से बच रहे हैं?
⚠️ क्या दबंगई के आगे बेबस है सिस्टम?
⚠️ आखिर कब होगी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई?












