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बैन के बावजूद ईरान को भेजे परमाणु प्लांट वाले हाईटेक डिवाइस, कंपनी का CEO अरेस्ट

अमेरिका में एक कंपनी के CEO जमशिद घोमी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिका और ईरान की दोहरी नागरिकता वाला 33 वर्षीय जमशिद घोमी पर आरोप है कि उन्होंने ईरान को कई कंप्यूटर और अन्य डिवाइस भेजे। फेडरल पुलिस के पास आई शिकायत के मुताबिक, जमशिद ने उन हाई-टेक कंप्यूटर नेटवर्किंग डिवाइसेज और सिक्योरिटी डिवाइसेज का अवैध तरीके से निर्यात किया जिन्हें दूसरे देश भेजने पर बैन लगा हुआ है।

अमेरिकी अभियोजक कार्यालय (Central District of California) के अनुसार, न्यूपोर्ट कोस्ट के निवासी जमशिद घोमी ने एकदशक से भी ज्यादा समय तक ईरान के परमाणु और सैन्य प्रतिष्ठानों के लिए संवेदनशील अमेरिकी तकनीक की तस्करी का एक गुप्त नेटवर्क चलाया। इस अवैध और देश-विरोधी कारोबार के जरिए उन्होंने करोड़ों डॉलर की काली कमाई की और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकते रहे।

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E-Bay से शुरू हुआ अवैध सप्लाई नेटवर्क

जांचकर्ताओं के मुताबिक, घोमी ने साल 2011 से 2023 के बीच ई-बे और पेपाल जैसे सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में अमेरिकी नेटवर्किंग उपकरण खरीदे। पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने इन सामानों को सीधे ईरान भेजने के बजाय पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) रूट पर भेजा। साल 2023 में उन्होंने मिनेसोटा और नेब्रास्का के अमेरिकी सप्लायर्स से सीधे सौदेबाजी की और UAE की फर्जी कंपनियों के जरिए इन्हें तेहरान पहुंचाया। इस पूरे खेल को छुपाने के लिए जहाजों के शिपिंग रिकॉर्ड और दस्तावेजों में भारी हेरफेर किया गया।

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परमाणु और रक्षा संस्थानों तक पहुंची तकनीक

रिपोर्ट के अनुसार, घोमी तेहरान स्थित फराज परदाज रायनेह (FPR) नामक कंप्यूटर नेटवर्किंग कंपनी का मालिक है, जिसका सालाना टर्नओवर 10 मिलियन डॉलर (करीब 95.79 करोड़ रुपये) से अधिक था। उसकी कंपनी की ग्राहक सूची में सबसे संवेदनशील नाम ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) और वहां के रक्षा मंत्रालय का था। घोमी की कंपनी ने साल 2017 से 2023 के बीच ईरान के यूरेनियम एनरिचमेंट और परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य इकाइयों को एडवांस अमेरिकी एन्क्रिप्शन और सुरक्षा उपकरण बेचे, जो पूरी तरह प्रतिबंधित थे।

काली कमाई से बनाई लग्जरी लाइफस्टाइल

घोमी की चालाकी सिर्फ स्मगलिंग तक सीमित नहीं थी, उन्होंने अमेरिकी टैक्स विभाग को भी धोखा दिया। ईरान की कमाई को उन्होंने दूसरे देशों के खातों से घुमाकर अमेरिका मंगाया और टैक्स रिटर्न में उसे ‘विदेशी वसीयत’ घोषित कर दिया।

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जमशिद घोमी ने कागजों पर खुद को बेहद गरीब दिखाकर सरकारी सब्सिडी भी ली जबकि हकीकत में इसी पैसे के दम पर उन्होंने कैलिफोर्निया के पॉश इलाके में 35 मिलियन डॉलर (करीब 335 करोड़ रुपये) का आलीशान बंगला बना लिया। अमेरिकी कानून (IEEPA) के तहत दोषी पाए जाने पर घोमी को अधिकतम 20 साल की जेल हो सकती है और उनकी संपत्ति जब्त करने की तैयारी चल रही है।


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