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कागजों में बदली स्लॉटर हाउसो की तैनाती, लंबे समय से जमे डाक्टरों का ही जलवा बरकरार

 मनीष तिवारी 

उन्नाव। पशुपालन विभाग में स्लॉटर हाउस एवं मीट प्रोसेसिंग यूनिटों में वर्षों से जमे पशु चिकित्सकों के तबादले के बाद अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है। शासन स्तर पर तैनातियां बदलने और नए चिकित्सकों को जिम्मेदारी सौंपने के आदेश जारी होने के बावजूद कई स्थानों पर अभी तक नए अधिकारियों को कार्य संचालन के लिए आवश्यक आईडी और पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में चर्चा है कि कागजों पर भले ही बदलाव दिख रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य अभी भी पुराने चिकित्सकों के माध्यम से ही कराया जा रहा है।
प्रदेश के 14 जिलों में हाल ही में स्लॉटर हाउसों और मीट प्रोसेसिंग यूनिटों में तैनात पशु चिकित्सकों को बदलने के आदेश जारी किए गए थे। यह कार्रवाई लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात चिकित्सकों को हटाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्नाव सहित कई जिलों में नई तैनाती सूची लागू कर दी गई, लेकिन अब उसके क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं।

नए डॉक्टर जिम्मेदारी, लेकिन सिस्टम तक पहुंच नहीं

विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन चिकित्सकों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें अब तक संबंधित ऑनलाइन पोर्टल और निरीक्षण व्यवस्था से जुड़े आईडी-पासवर्ड नहीं दिए गए हैं। ऐसे में वे अपने अधिकार क्षेत्र का कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप कई जगहों पर पुराने चिकित्सकों की मदद ली जा रही है और वही व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं।

बदलाव की मंशा पर उठ रहे सवाल

विभाग के कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि नई तैनातियों के बाद भी पुराने अधिकारियों से ही कार्य लिया जा रहा है तो फिर तबादलों का वास्तविक उद्देश्य क्या पूरा हो पाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करना भी जरूरी है।

उन्नाव में सबसे अधिक चर्चा
उन्नाव में हालिया तैनातियों को लेकर पहले से ही चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा शासनादेश की अनदेखी की गई है जिसका कार्यक्षेत्र है उनकी जगह दूसरे की तैनाती कर दी गई है। नई तैनाती डाक्टरों को अब आईडी-पासवर्ड और कार्य संचालन को लेकर सामने आई जानकारी ने विभागीय गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

तबादले हुए, चार्ज नहीं!
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई स्थानों पर नए चिकित्सकों को तैनाती आदेश तो मिल गए, लेकिन डिजिटल एक्सेस, लॉगिन आईडी और कार्य संचालन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में पुराने चिकित्सकों का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। कर्मचारी इसे “आधा-अधूरा बदलाव” बताकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वास्तविक जिम्मेदारी किसके पास है।

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