नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयमपूर्ण उपभोग और बचत संबंधी अपीलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार की नीतियों को आर्थिक विफलता का प्रतीक बताते हुए कहा कि जनता पर पाबंदियां और उपदेश थोपे जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की उस अपील पर सवाल उठाए, जिसमें लोगों से सोना कम खरीदने, विदेश यात्राएं टालने, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, खाद और कुकिंग ऑयल का सीमित उपयोग करने, मेट्रो से सफर करने तथा घर से काम करने की सलाह दी गई थी। राहुल ने कहा कि 12 वर्षों के शासन के बाद देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है कि अब जनता को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर संकट की जिम्मेदारी आम लोगों पर डालकर सरकार खुद जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश चलाना अब ‘समझौता करने वाले प्रधानमंत्री’ के बस की बात नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी आर्थिक और नीतिगत असफलताओं को छिपाने के लिए जनता से त्याग की अपील कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री के ‘बचत के पाठ’ पर तंज कसते हुए कहा कि जब देश महंगाई, गिरते रुपये और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है, तब जनता को उपदेश दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बनने के बाद कांग्रेस ने सरकार को अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले खतरे को लेकर आगाह किया था, लेकिन उस समय सरकार चुनावी गतिविधियों में व्यस्त रही।
खरगे ने सवाल किया कि जब देश आर्थिक संकट की आशंका से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री रोड शो और चुनाव प्रचार में क्यों लगे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही अब जनता से कटौती और बचत की बातें की जा रही हैं। तुलसीदास की चौपाई ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा कि दूसरों को सलाह देना आसान होता है, लेकिन खुद उस पर अमल करना कठिन।
कांग्रेस के तीखे बोल,आर्थिक विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही केंद्र सरकार
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