बलरामपुर के सादुल्लानगर स्थित श्री पवन पुत्र हनुमान जी मंदिर में आयोजित पाँच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ अनुष्ठान के पाँचवें दिन श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग का वर्णन किया गया, जिससे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। कथा व्यास पंडित ओम नारायण मिश्र ‘दद्दन महाराज’ शास्त्री ने भगवान श्रीराम के वनवास पूर्ण कर अयोध्या आगमन और भव्य राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सत्य, धर्म और मर्यादा की विजय के प्रतीक श्रीराम का जीवन समस्त मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके राज्याभिषेक के साथ ही आदर्श ‘रामराज्य’ की स्थापना हुई, जो न्याय, समानता और धर्म के सिद्धांतों पर आधारित था। राज्याभिषेक के वर्णन के साथ ही पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन दिखे और वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के दौरान प्रस्तुत मधुर भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को भाव-विभोर किया। यज्ञ अनुष्ठान के तहत यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन का क्रम जारी रहा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामनाओं के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
बलरामपुर में श्रीराम कथा, राज्याभिषेक प्रसंग का वर्णन:पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंजा, आदर्श रामराज्य पर जोर
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