लखनऊ। डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज,के मूत्र रोग एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग ने एक चालीस वर्षीय महिला में अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल रोबोटिक कैंसर सर्जरी की। पूनम गौर,गोरखपुर निवासी जोकि एक गृहिणी है। उनकी बाईं किडनी में बड़ा ट्यूमर था। जबकि प्रो डा आलोक ने बताया कि यह कैंसर दूसरी स्टेज तक पहुंच चुका था। इसमें इन्फीरियर वेना कावा ट्यूमर थ्रॉम्बस के साथ प्रस्तुत हुईं। इमेजिंग में महाधमनी-पश्च वाम वृक्क शिरा की उपस्थिति पाई गई, जो एक दुर्लभ जन्मजात रक्तवाहिनी असामान्यता है।
उन्होंने बताया केवल लगभग दस प्रतिशत गुर्दे का कैंसर के मामलों में थ्रॉम्बस पाया जाता है। इनमें से लगभग 75 प्रतिशत मामलों में दाहिनी किडनी प्रभावित होती है, जिसका मुख्य कारण दाहिनी वृक्क शिरा का अपेक्षाकृत छोटा मार्ग होना है। शेष लगभग 25 प्रतिशत मामले बाईं किडनी से संबंधित होते हैं और अधिकांशतः बाएं गुर्दे की शिरा के आईवीसी में खुलने वाले स्थान तक ही सीमित रहते हैं। प्रो डा आलोक के मुताबिक,बाएं वृक्क शिरा का महाधमनी-पश्च मार्ग सामान्य जनसंख्या के केवल एक–दो प्रतिशत लोगों में पाया जाता है। ऐसे मामलों में ट्यूमर थ्रॉम्बस की उपस्थिति सर्जरी को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना देती है। यह मामला संभवतः विश्व का पहला ऐसा मामला है जिसे पूर्णतः रोबोटिक दृष्टिकोण द्वारा सफलतापूर्वक प्रबंधित किया गया। इस रोबोटिक प्रक्रिया के कारण बड़े खुला शल्य चीरा की आवश्यकता नहीं पड़ी,जिससे कम खून की कमी,कम ऑपरेशन के बाद का दर्द, शीघ्र वसूली तथा कम अस्पताल में ठहराव का लाभ मिला। प्रो डा आलोक ने बताया मरीज की पांच घंटे सर्जरी चली। जिसमें यहां इसका खर्च लगभग एक लाख तीन हजार आया है। जोकि निजी अस्पताल में इसका खर्च सात से आठ लाख आयेगा।
यह रही ऑपरेशन की टीम
प्रो.आलोक श्रीवास्तव, प्रो. ईश्वर राम धायल, प्रो. संजीत सिंह,
एनेस्थीसिया टीम:- डॉ. पूनम, प्रो. पी.के. दास, डॉ. ब्रह्मदत्त शर्मा, डॉ. दिग्विजय सिंह, रेजिडेंट:- डॉ. पृथ्वी, डॉ. अनुराग नर्सिंग सुपरवाइज़र :-जेनिफर रही।












