लखनऊ। डॉ.विकास अवस्थी को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, से तबला वादन विषय में पीएच.डी. की प्रतिष्ठित शोध उपाधि प्रदान किए जाने की खबर भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।
यह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि संगीत-साधना, आध्यात्मिक आस्था, पारिवारिक मूल्यों और राजकीय सेवा के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक भी है। डॉ. अवस्थी ने “ तबले में विस्तारशील एवं अविस्तारशील रचनाओं की तुलना : पूरब बाज के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” पीएच.डी. जैसी उच्च स्तरीय शोध यात्रा केवल बौद्धिक क्षमता या व्यक्तिगत परिश्रम से नहीं बनती; इसके लिए परिवार का समर्थन, धैर्य और समय-प्रबंधन भी अनिवार्य है। डॉ.अवस्थी ने न केवल एक समर्पित शोधार्थी के रूप में बल्कि पुत्री अद्रिका के पालन-पोषण और सेवा का उत्तरदायित्व निभाते हुए यह साबित किया कि पारिवारिक दायित्व और शैक्षणिक महत्वाकांक्षा एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। उनकी धर्मपत्नी अम्बिका अवस्थी, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीतापुर, के धैर्य, नैतिक समर्थन तथा प्रेरणा ने इस शोध-यात्रा को सहज और प्रेरक बनाया। उन्होंने अपनी श्रद्धेय माताजी के संस्कारों और आशीर्वाद को भी सफलता का आधार माना।
डॉ.विकास अवस्थी ने हासिल की पीएच.डी. की प्रतिष्ठित शोध उपाधि
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