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सिद्धार्थनगर में खाद के संकट में तड़पते किसान:नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर तीखा वार


खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खाद की किल्लत और सहकारी समितियों पर आपूर्ति की कमी को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इटवा से समाजवादी पार्टी के विधायक और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने भाजपा सरकार पर किसानों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। किसानों की परेशानी: समितियों पर ताले, बाजार में महंगा दाम नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि क्षेत्र के कई साधन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है, जिससे किसान भटकने को मजबूर हैं। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से ऊंचे दामों पर उर्वरक खरीदना पड़ रहा है। धान की रोपाई और शुरुआती सिंचाई के बाद खाद की जरूरत बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई है। सरकार पर गंभीर आरोप: पहले से थी जानकारी, फिर भी तैयारी नहीं माता प्रसाद पाण्डेय ने आरोप लगाया कि सरकार को उर्वरक संकट की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद कोई ठोस तैयारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही सीधे तौर पर किसानों के हितों पर चोट है। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि नीतिगत स्तर पर भी गंभीर खामियां दिखाई दे रही हैं। किसानों की आवाज: उत्पादन पर मंडराता संकट उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर खाद की आपूर्ति नहीं हुई तो फसल उत्पादन प्रभावित होगा। किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है और आने वाले समय में खाद्यान्न संकट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही मौसम और लागत की मार झेल रहे हैं, अब खाद की कमी उनकी चिंता और बढ़ा रही है। समितियों की स्थिति: व्यवस्था पर सवाल नेता प्रतिपक्ष ने सहकारी समितियों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई समितियों में खाद वितरण या तो बंद है या बेहद सीमित मात्रा में हो रहा है। इससे किसानों को लंबी कतारों और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि समितियों को तुरंत सक्रिय किया जाए और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए। सरकार से सख्त मांग: तत्काल राहत नहीं तो आंदोलन के संकेत पाण्डेय ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि जिले की सभी सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाने से पीछे नहीं हटेगा। निष्कर्ष: खेतों में उम्मीद, व्यवस्था पर सवाल खरीफ की फसल जहां किसानों से उम्मीदें मांग रही है, वहीं खाद की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते व्यवस्था सुधरेगी या किसान एक बार फिर संकट की मार झेलेंगे।

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