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बस्ती के छावनी-अमोढ़ा में ‘गुड़िया पीटने’ की लोक परंपरा:नाग पंचमी पर सदियों पुरानी यह रस्म उत्साह के साथ निभाई गई

#बस्ती_न्यूज

बस्ती में नाग पंचमी के पावन अवसर पर बस्ती जिले के छावनी और अमोढ़ा (बटौली गांव) क्षेत्र में सदियों पुरानी ‘गुड़िया पीटने’ की लोक परंपरा उत्साह के साथ मनाई गई. इस पारंपरिक उत्सव में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों, युवाओं और बड़े-बुजुर्गों ने भाग लिया. इस रस्म के तहत, घर की छोटी बच्चियों और महिलाओं ने पुराने रंग-बिरंगे कपड़ों से सुंदर गुड़िया बनाईं. शाम के समय, गांवों के बच्चे और युवा लाठी-डंडे लेकर प्राथमिक विद्यालयों या गांवों के मुख्य चौराहों पर एकत्र हुए. परंपरा के अनुसार, लड़कियों ने इन गुड़ियों को जमीन पर रखा, जिसके बाद लड़कों ने रंग-बिरंगी छड़ियों और डंडों से उन्हें प्रतीकात्मक रूप से पीटा. यह रस्म पूरी होने के बाद बच्चों में प्रसाद वितरित किया गया. घरों में सावन के पारंपरिक पकवान जैसे सवईं और चने बनाए गए. ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग इस रस्म को अपनी लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. इस परंपरा के पीछे एक प्राचीन लोककथा है, जो भाई-बहन के प्रेम और नाग देवता से जुड़ी है. धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार एक लड़की ने अपने भाई की जान बचाने के डर से अनजाने में मंदिर में नाग देवता को डंडे से मार दिया था. बाद में जब उसे अपनी भूल का एहसास हुआ तो वह बहुत दुखी हुई. समाज और पुजारियों ने तय किया कि नाग देवता पूजनीय हैं, इसलिए लड़की को दंड मिलना चाहिए. चूंकि यह भूल अनजाने में हुई थी, इसलिए लड़की के बदले कपड़े की गुड़िया बनाकर उसे प्रतीकात्मक रूप से पीटने का निर्णय लिया गया. तभी से भाई-बहन के अटूट प्रेम और जीव संरक्षण के प्रतीक के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है. आधुनिक दौर में जहां कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे कम हो रही हैं, वहीं बस्ती के ग्रामीण इलाकों में यह सदियों पुरानी रस्म आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है.
#बस्ती न्यूज़ टुडे

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