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सरकार ने चांदी की सिल्लियों के आयात से जुड़ी नीति को सख्त किया

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने चांदी की सिल्लियों के आयात से जुड़ी नीति को सख्त कर दिया है और तत्काल प्रभाव से उनकी स्थिति को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ कर दिया है। इससे पहले केंद्र ने 13 मई को कीमती धातुओं पर आयात शुल्क छह फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने शनिवार को जारी एक अधिसूचना में बताया कि सोने और प्लैटिनम के साथ मिलाई जाने वाली चांदी सहित चांदी की आयात नीति को तत्काल प्रभाव से मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया है।

अधिसूचना में बताया कि सरकार ने चांदी के इंपोर्ट पर नई पाबंदियां लगा दी हैं, जिसके तहत इस धातु की कई कैटेगरी को “फ्री” से “प्रतिबंधित” इंपोर्ट पॉलिसी के दायरे में डाल दिया गया है।

डीजीएफटी की अधिसूचना के मुताबिक सरकार ने यह कदम कीमती धातुओं के आयात पर निगरानी को सख्त करने और देश के बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करने के सरकार के व्यापक प्रयासों के बीच उठाया है।

अधिसूचना के मुताबिक बदले हुए नियमों के तहत, चांदी की सिल्लियों, बिना गढ़ी हुई चांदी और आधी बनी हुई चांदी के रूपों (जिसमें पाउडर के रूप में चांदी भी शामिल है) के आयात के लिए अब सरकार की मंज़ूरी लेना ज़रूरी होगा।

साथ ही चांदी के आयात की कुछ खास श्रेणियों को भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के दायरे में भी लाया गया है। ये बदलाव आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण के तहत आयात नीति की सूची में किए गए संशोधनों के ज़रिए लागू किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने चांदी के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखने का यह कदम कीमती धातुओं पर भारी सीमा शुल्क लगाने के कुछ ही दिनों बाद उठाया है। प्रतिबंधित श्रेणी के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं के आयात के लिए सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता होती है।

 

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