श्रावस्ती जनपद के जमुनहा विकास क्षेत्र में हर साल बरसात का मौसम आधा दर्जन से अधिक गांवों के लिए गंभीर चुनौतियां लेकर आता है। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट जाता है, जिससे पूरा इलाका टापू में बदल जाता है और ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा लेना पड़ता है। सेमरहनिया घाट पर आज भी पुरानी नावों के माध्यम से राप्ती नदी पार की जाती है। दोपहिया वाहनों को भी नावों पर लादकर नदी के उस पार ले जाया जाता है। बरसात के दिनों में नदी का तेज बहाव इस यात्रा को अत्यंत खतरनाक बना देता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों की देरी होती है, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न होने का खतरा रहता है। पुल के अभाव में लक्ष्मणपुर, सेमरहनिया सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लगभग 15 किलोमीटर की दूरी के बजाय 30 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पुल और सड़क के अभाव में कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को विवश हो गए हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरोज यादव और अन्य स्थानीय निवासियों ने बताया कि सेमरहनिया घाट पर पुल निर्माण से हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से संबंधित समस्याओं का भी समाधान होगा। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि बरसात में उत्पन्न होने वाली इस गंभीर समस्या को देखते हुए सेमरहनिया घाट पर शीघ्र पुल और संपर्क मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि सीमावर्ती गांवों को स्थायी राहत मिल सके। जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने बताया कि जिला प्रशासन बाढ़ समेत सभी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जनपद में पूर्व सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है और स्वचालित वर्षा मापी व मौसम सूचना प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाढ़ की सूचना मिलते ही अपने निकटतम बाढ़ शरणालय में पहुंचें। शरणालयों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
श्रावस्ती के जमुनहा में आधा दर्जन गांव टापू:राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से मुख्य मार्गों से संपर्क कटा
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