हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार तड़के आए भीषण आंधी-तूफान ने बड़ा हादसा कर दिया। ललपुरा थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल की स्लैब और शटरिंग अचानक भरभराकर ढह गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में अब तक छह मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मजदूरों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
हादसे के दौरान तीन मजदूर पुल के पिलर पर फंस गए थे, जिन्हें एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। यह हादसा देर रात तेज आंधी और तूफान के दौरान हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और सुबह तक राहत एवं बचाव अभियान चलता रहा।
निमार्णाधीन पुल ललपुरा थाना क्षेत्र में मोराकांदर, परसनी और कंडौर गांवों के बीच बनाया जा रहा था। यह पुल राठ-हमीरपुर स्टेट हाईवे को कुरारा फोरलेन हाईवे से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। पुल निर्माण की मंजूरी राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद की पहल पर मिली थी और इसके बनने से क्षेत्र के 26 गांवों के करीब डेढ़ लाख ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद थी।
ललपुरा थाना प्रभारी राजेश कुमार सरोज ने बताया कि राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद ली गई। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कोई अन्य मजदूर अभी मलबे में दबा तो नहीं है। हादसे में जान गंवाने वालों में लोकेंद्र उम्र 22 वर्ष पुत्र राधेश्याम निषाद निवासी चिल्ला थाना चिल्ला जनपद बांदा , कुलदीप उम्र 19 वर्ष निषद पुत्र प्रेमचंद निवासी चिल्ला थाना चिल्ला जनपद बांदा, सावंत यादव उम्र 28 वर्ष निवासी भूरागढ़ बांदा , सभाजीत उम्र 30 वर्ष पुत्र गयादीन निवासी भूरागढ़ जनपद बांदा ,पुष्पेंद्र सिंह उम्र 34 वर्ष चौहान पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी स्वासा खुर्द थाना ललपुर हमीरपुर, ,राजेश पाल उम्र 42 वर्ष पुत्र सभाजीत निवासी अचपुरा थाना ललपुर हमीरपुर शामिल हैं। वहीं पिलर पर फंसे अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में बेतवा नदी पर यह पुल तीन वर्ष पहले स्वीकृत हुआ था। परियोजना पर करीब 79 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पुल बनने से परसनी, मोराकांदर, स्वासा बुजुर्ग, स्वासा खुर्द, कुम्हऊपुर, कंडौर, बैजेमऊ, इस्लामपुर, हरेहटा, पतारा, जखेला, रिठारी और देवीगंज समेत 26 गांवों को बड़ी राहत मिलने वाली थी। अभी लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन पुल बनने के बाद दूरी काफी कम हो जाती।
राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुल अगले वर्ष तक पूरा होकर जनता को सौंपा जाना था, लेकिन हादसे के बाद निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और घायलों के बेहतर इलाज सुनिश्चित करने को कहा है।












