HomeHealth & Fitnessअम्बेडकरनगर में मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 07 गिरफ्तार

अम्बेडकरनगर में मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 07 गिरफ्तार

अम्बेडकरनगर। पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के निर्देशन में अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी नगर के पर्यवेक्षण में थाना कोतवाली अकबरपुर पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHT), स्वाट और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के 07 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर एक अपहृता युवती को सकुशल बरामद किया है।

यह कार्रवाई 05 जुलाई 2026 को उस समय की गई जब एएचटी थाना प्रभारी उपनिरीक्षक जैद अहमद, स्वाट व सर्विलांस टीम तथा थाना कोतवाली अकबरपुर पुलिस की संयुक्त टीम बाल श्रम, भिक्षावृत्ति निषेध और मानव तस्करी रोकथाम अभियान के तहत क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग एक युवती को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाने की तैयारी में हैं और बसखारी मार्ग स्थित खिद्दिरपुर (टाटा मोटर्स के पास) वाहन का इंतजार कर रहे हैं। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी और सभी को पकड़ लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों में बाबूलाल, मोहनलाल, नरेंद्र कुमार, बीराराम (सभी राजस्थान निवासी), नसरुद्दीन (आजमगढ़), चंद्रकला उर्फ पूनम (राजस्थान निवासी) और ऊषा (अम्बेडकरनगर निवासी) शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से अपहृता युवती को सुरक्षित बरामद किया तथा ₹40,000 नकद भी बरामद किए।

पूछताछ में गिरोह ने मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क का खुलासा किया। अभियुक्तों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय और अनाथ युवतियों को निशाना बनाते थे। स्थानीय सदस्य ऐसे परिवारों की पहचान करते थे जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हों तथा विरोध या कानूनी कार्रवाई करने में असमर्थ हों। इसके बाद युवतियों को अच्छे और संपन्न परिवार में विवाह का झांसा देकर भरोसे में लिया जाता था।

गिरोह द्वारा पूरी तरह सुनियोजित तरीके से फर्जी विवाह समारोह आयोजित किए जाते थे, जिसमें गिरोह के सदस्य ही दूल्हा, बाराती और रिश्तेदार बनते थे ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद युवतियों को “विदाई” के नाम पर राजस्थान और हरियाणा ले जाया जाता था। इस दौरान एक महिला आरोपी चंद्रकला उर्फ पूनम भी साथ रहती थी ताकि यात्रा के दौरान संदेह न हो।

आगे की जांच में सामने आया कि आरोपी युवतियों की पहचान बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और उन्हें रेलवे या बस स्टेशनों के आसपास कुछ समय तक होटलों में ठहराते थे ताकि परिस्थितियों का आकलन किया जा सके और किसी तरह की पुलिस जांच से बचा जा सके।

सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ कि राजस्थान पहुंचने के बाद युवतियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अनैतिक देह व्यापार में धकेल दिया जाता था और उनकी वापसी लगभग असंभव बना दी जाती थी। गिरोह युवतियों के परिजनों और पुलिस से बचने के लिए उनकी असली पहचान भी छिपा देता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि एक युवती के बदले राजस्थान में ग्राहकों से लगभग ₹2,00,000 की रकम ली गई थी, जिसमें ₹1,00,000 नकद और ₹1,00,000 बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए प्राप्त हुए थे। इसमें से ₹40,000 नकद आरोपी ऊषा के पास से बरामद किए गए।

इस पूरे मामले में थाना कोतवाली अकबरपुर में मु0अ0सं0-407/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 87, 318(4) तथा अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 9 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही गिरोह के अन्य फरार सदस्यों, उनके आर्थिक नेटवर्क और अन्य राज्यों में सक्रिय सहयोगियों की तलाश के लिए विस्तृत विवेचना जारी है तथा उनकी संपत्तियों की जांच और जब्ती की कार्रवाई भी की जा रही है।

अम्बेडकरनगर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और ऐसे संगठित अपराधों पर कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

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