सिद्धार्थनगर जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रात के समय 6 से 7 घंटे तक लगातार बिजली गुल रहने से लगभग 25 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि ‘रोस्टिंग’ के नाम पर केवल गांवों की बिजली काटी जा रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। बिजली न होने से पंखे, कूलर और पानी की मोटरें बंद हो जाती हैं, जिससे लोग पूरी रात जागने को मजबूर हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनपद में विद्युत विभाग के तीन डिवीजन और 32 पावर हाउस हैं, जिनसे लगभग 4 लाख 25 हजार उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। यदि प्रत्येक परिवार में औसतन छह सदस्य माने जाएं, तो करीब 25 लाख लोग सीधे तौर पर इस बिजली संकट से जूझ रहे हैं। रात होते ही गांवों में अंधेरा छा जाता है, और कई लोग घरों के बाहर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को विवश हैं। गांवों में हालात इतने खराब हैं कि लोग हाथ के पंखे से बच्चों को हवा कर रहे हैं। बिजली न होने से पानी की टंकियां खाली हो रही हैं, जिससे पेयजल संकट भी गहरा रहा है। इसके अतिरिक्त, कई स्थानों पर मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर की मेहनत के बाद रात में भी उन्हें आराम नहीं मिल पा रहा है। वे बिजली विभाग पर शहर और गांव के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही हर बार कटौती का बोझ क्यों झेलें।
उबाल भरी गर्मी में ग्रामीण इलाकों की रातें अंधेरे में:6 से 7 घंटे हो रही अघोषित बिजली कटौती, 25 लाख लोग बेहाल
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