मुंबई । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को अपमानजनक कंटेंट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। नितिन गडकरी की तरफ से दायर याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन वेबसाइट पर अपलोड की गई पोस्ट को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है।
जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गडकरी के खिलाफ साझा की जा रही कथित मानहानिकारक और अपमानजनक सामग्री को तुरंत हटाया जाए। यह आदेश उस याचिका पर दिया गया, जिसमें गडकरी ने दावा किया था कि डीपफेक और फर्जी सामग्री के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। नितिन गडकरी ने मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मेटा’और ‘एक्स’ को प्रतिवादी बनाया था। उन्होंने याचिका में कहा था कि सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो में दावा किया गया है कि गडकरी और उनके परिवार के सदस्यों को केंद्र सरकार की एथेनॉल पॉलिसी से आर्थिक लाभ मिला। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद और झूठ बतया था। उन्होंने कहा कि ये आरोप जनता को गुमराह करने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए गढ़े गए।
भ्रामक कंटेंट को हटाना का निर्देश
कोर्ट ने अपने अंतरिम ऑर्डर में कहा, ऐसी ही एक ट्रांसक्रिप्ट इंस्टाग्राम रील पर दिखती है और भी कंटेंट हैं। जिस मटीरियल को प्लेनटिफ हटाना चाहता है, मैं बस इतना कह सकता हूं कि वह बिल्कुल घटिया और गाली-गलौज वाला है। ऐसे मटीरियल की पब्लिक प्लेटफॉर्म पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए, जो युवाओं समेत सभी के लिए उपलब्ध है। एप्लीकेंट ने अंतरिम राहत के लिए केस किया है। मेटा और गूगल पेश हुए हैं और वे एग्ज़िबिट C में दिए गए मटीरियल को हटाने के लिए सहमत हो गए हैं। उनका बयान स्वीकार किया जाता है। इसलिए, उसने निर्देश दिया कि ऐसे कंटेंट को हटा दिया जाए।हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह निर्देश सद्भावनापूर्ण (बोना फाइड) और तथ्य आधारित निष्पक्ष आलोचना पर लागू नहीं होगा। यानी सरकार की नीतियों या गडकरी के कामकाज पर वैध और जिम्मेदार आलोचना जारी रह सकती है, लेकिन फर्जी, भ्रामक, डीपफेक या मानहानिकारक सामग्री को संरक्षण नहीं मिलेगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट से नितिन गडकरी को बड़ी राहत, जनिये किस मामले में
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