नई दिल्ली। भारतीय स्टार्टअप ‘विमैग लैब्स’ इन दिनों अपनी खास मोटर को लेकर काफी चर्चा में है। दरअसल इस स्टार्टअप ने ऐसी अनोखी इलेक्ट्रिक मोटर बनाई है, जिसमें किसी तरह की रेयर अर्थ मैगनेट्स का इस्तेमाल नहीं होता। इसकी जगह यह मोटर सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की मदद से खुद ही मैग्नेटिक फील्ड तैयार करती है।
इस स्वदेशी तकनीक के लिए कंपनी को पांचवां भारतीय पेटेंट भी मिल चुका है। दरअसल यह स्टार्टअप एक ऐसी समस्या का समाधान ढूंढ रही है, जिसने टेस्ला और जीएम जैसी दिग्गज कार कंपनियों को सालों से परेशान किया है। दरअसल अभी तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चीन से आने वाले खास चुंबकीय तत्वों की जरूरत पड़ती है, जिसे इस कंपनी की तकनीक खत्म कर सकती है।
विमैग लैब्स ने क्या सुलझा लिया है?
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में परमानेंट मैग्नेट मोटर का इस्तेमाल होता है। जिसके लिए रेयर अर्थ मैग्नेट्स की जरूरत पड़ती है। इन खास चुंबकीय तत्वों की सप्लाई को चीन कंट्रोल करता है।
विमैग लैब्स का दावा है कि उन्होंने जो वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर बनाई है, वह बिना चुंबकों के भी काम कर सकती है। इतना ही नहीं बिना चुंबकों के भी यह मोटर पारंपरिक मोटर के बराबर और कई मामलों में उससे बेहतर परफॉर्मेंस दे सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक को तैयार करने में इंजीनियरों ने 87,000 से ज्यादा घंटे काम किया है।
बिन चुंबक कैसे चलेगी मोटर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक(REF.) इस मोटर की खासियत है कि यह चलने के लिए स्थायी चुंबक पर निर्भर नहीं करेगी। इसकी जगह यह सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के तालमेल पर काम करेगी।
इसमें बिजली के प्रवाह को बेहद सटीक तरह से नियंत्रित किया जाएगा। इसके लिए एडवांस एल्गोरिदम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल होगा। बिजली का यह नियंत्रित प्रवाह बिना किसी असल चुंबक के एक मजबूत और गतिशील चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है।
इसके अलावा इस मोटर का डिजाइन ब्रशलेस और स्लिप-रिंग मुक्त होता है। जिससे, घर्षण और टूट-फूट की समस्या नहीं होती।
आसान शब्दों में कहें, तो यह एक सॉफ्टवेयर आधारित मोटर है, जो चुंबक का काम बैकएंड पर कोडिंग और बिजली के दम पर कर ले लेती है।
चीन के दबदबे को चुनौती
गौर करने वाली बात है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए इस्तेमाल होने वाली चुंबकों के रिफाइनिंग और प्रोडक्शन पर 90% से ज्यादा कब्जा चीन का है।
चीन समय-समय पर इन रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर पाबंदियां लगाता रहता है। इससे अमेरिकी और यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को गाड़ियों का उत्पादन रोकना पड़ता है।
इन खतरों को देखते हुए दुनियाभर की कार बनाने वाली कंपनियां चीन पर निर्भरता को कम करने के बारे में सोच रही हैं। ऐसे में विमैग लैब्स की यह तकनीक चीन के एकाधिकार को जबरदस्त चुनौती दे सकती है।
बिना चुंबक वाली मोटर की रेस में और कौन?
बिना मैग्नेट वाली मोटर की खोज में विमैग लैब्स अकेली नहीं है। टेस्ला ने 2023 में ही घोषणा कर दी थी कि उनकी अगली मोटर बिना चुंबक के होगी।
इसके अलावा जनरल मोटर्स और होंडा जैसी कंपनियां इसके दूसरे विकल्पों जैसे कि आयरन-नाइट्राइड मैग्नेट और रीसाइक्लिंग पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रही हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात है कि भारी मात्रा में निवेश करने के बाद भी कोई भी कंपनी इस तरह की मोटर का बड़े पैमाने पर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू नहीं कर पाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विमैग लैब्स की खास तकनीक शुरुआती टेस्टिंग में काफी शानदार रही है। इसे तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक्सेल जैसी कंपनियों ने पैसा भी लगाया है। अब बड़ी चुनौती इस मोटर को बड़े पैमाने पर बनाने की है। अक्सर लैब में सफल होने वाले प्रयोग बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान लागत, टिकाऊपन और माइलेज के मामले में पिछड़ जाते हैं। ऐसे में अब कंपनी इसे बड़े पैमाने पर बनाने पर फोकस करेगी।












