दोहा/ तेहरान/ वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के भीतर फंसे दोनों अमेरिकी लड़ाकू पायलटों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। ट्रंप के अनुसार, यह अभियान अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में शामिल है, जिसमें दर्जनों अत्याधुनिक हथियारों से लैस विमानों को लगाया गया। उन्होंने कहा कि पायलट अब सुरक्षित हैं और उन्हें मामूली चोटें आई हैं।
हालांकि, ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ताओं का कहना है कि अमेरिकी बचाव अभियान पूरी तरह विफल रहा और इस दौरान दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर तथा एक सी-130 सैन्य विमान को मार गिराया गया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने एक इजरायली ड्रोन को भी नष्ट कर दिया है।
इस बीच, क्षेत्र में हमलों का सिलसिला भी जारी है। कुवैत में वित्त मंत्रालय पर ड्रोन हमला किया गया, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। साथ ही शुवैख इलाके की एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे पहले कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया था, जहां ईंधन टैंकों में आग लग गई थी।
तनाव को और बढ़ाते हुए ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि समयसीमा समाप्त होने पर ईरान पर भीषण हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि तेहरान में हुए एक हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को मार गिराया गया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी चेतावनी को खारिज करते हुए पलटवार की धमकी दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि यदि उसके बुनियादी ढांचे पर कोई भी हमला हुआ, तो पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी और इजरायल के ठिकानों पर व्यापक और लगातार हमले किए जाएंगे।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बाद से क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई और तीखे बयानबाजी से पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध का खतरा गहरा गया है।











