चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने ‘सॉल्व’ (सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स) के ठोस ईंधन (सॉलिड मोटर) वाले रॉकेट का पहला सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 3 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में किया गया, जिसमें मोटर का प्रदर्शन सभी निर्धारित मानकों पर खरा उतरा।
इसरो के अनुसार, ‘सॉल्व’ एक विशेष परीक्षण रॉकेट है, जिसे गगनयान मिशन से पहले क्रू मॉड्यूल की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी प्रणाली की जांच के लिए विकसित किया गया है। परीक्षण मिशनों के दौरान क्रू मॉड्यूल को 10 से 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाकर रॉकेट से अलग किया जाएगा। इसके बाद 10 पैराशूट क्रमवार खुलेंगे, जिससे मॉड्यूल की गति नियंत्रित होगी और वह सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरेगा।
सॉल्व का ठोस ईंधन चरण पीएसएलवी के स्ट्रैप-आॅन मोटर पर आधारित है, लेकिन गगनयान की जरूरतों के अनुरूप इसमें धीमी गति से जलने वाले प्रणोदक और उन्नत दिशा नियंत्रण प्रणाली जैसे कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। गगनयान मिशन के तहत दो से तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर ऊंची पृथ्वी की कक्षा में तीन दिन के मिशन पर भेजा जाएगा। मिशन पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित उतारा जाएगा।
इसरो ने बताया कि मानव मिशन से पहले आईएडीटी, पैड एबॉर्ट टेस्ट और टेस्ट व्हीकल उड़ानों सहित कई परीक्षण किए जाएंगे। मिशन के लिए मानव-रेटेड एलवीएम-3 रॉकेट और विशेष क्रू एस्केप सिस्टम का इस्तेमाल होगा, जो किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह उपलब्धि भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गगनयान मिशन की तैयारी में बड़ी उपलब्धि, इसरो ने सॉल्व रॉकेट का किया सफल परीक्षण
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