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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना ने ‘खेत बचाओ’ कार्यक्रम किया:किसानों को जैव उर्वरक, हरी खाद और मृदा स्वास्थ्य के फायदे बताए


सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र भनवापुर के हरिबन्धनपुर गांव में कृषि विज्ञान केंद्र सोहना द्वारा “खेत बचाओ” कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंगलवार को हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने किसानों को खेती की लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैव उर्वरक एवं हरी खाद के प्रयोग की सलाह दी। उन्होंने रसायनों पर निर्भरता कम करने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने, खेत न जलाने पर जोर दिया। डॉ. सर्वजीत ने बताया कि धान की नर्सरी बोने से पहले ट्राईकोडर्मा से बीज को 8-10 ग्राम प्रति किलो की दर से उपचारित करना चाहिए। डॉ. प्रवेश कुमार ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए हरी खाद, जैव उर्वरकों के उपयोग और मृदा कार्बनिक पदार्थों के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिक कार्बनिक पदार्थ होने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है और मित्र फफूंद (ट्राईकोडर्मा) की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है, जो फसलों को रोगों से बचाते हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और फसल उत्पादन लागत में कमी आती है। उन्होंने जोर दिया कि स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ कृषि और बेहतर उत्पादन का आधार है। पशु विज्ञान के वैज्ञानिक सुनील कुमार सिंह ने किसानों को बकरी पालन, मुर्गी पालन और पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशुपालन को बढ़ावा देने से दूध के साथ-साथ गोबर की खाद भी प्राप्त होती है। इस खाद का उपयोग करके प्राकृतिक खेती से रसायन मुक्त अनाज प्राप्त किया जा सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। इस कार्यक्रम में संजय चौधरी, विकास चौधरी, राम कारण गुप्ता, दिलीप मिश्रा, राम लाल चौधरी, विद्यासागर चौधरी सहित कई किसान उपस्थित रहे।

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