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अमरनाथ तीर्थयात्रियों को रवाना करने से पहले उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने की पूजा-अर्चना

जम्मू । जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों के प्रथम दल को रवाना करने से पहले पूजा-अर्चना की । उप राज्यपाल ने कहा कि अमरनाथ यात्रा हमारी आध्यात्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक आस्था का एक कालातीत प्रतीक है। यह देश के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें एक ऐसी जिम्मेदारी शामिल है जो देशभर के लाखों लोगों की श्रद्धा को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस तीर्थयात्रा की पवित्रता बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि यात्रा करने वाले हर श्रद्धालु को सुरक्षा, सम्मान, आराम और देखभाल के सर्वोत्तम मानक मिलें। सिन्हा ने कहा, “इस पवित्र अवसर पर मैं एक ऐसे जम्मू की कल्पना करता हूं जो आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक अध्ययन और मानवीय मूल्यों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरे। मैं तवी रिवरफ्रंट को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ विकास और आधुनिक शहरी योजना के लिए एक मिसाल बनते देखना चाहता हूं, जहां प्रकृति, संस्कृति और आधुनिक सुविधाएं एक-दूसरे के पूरक बनकर विकास का एक नया मॉडल तैयार करें।”

उप राज्यपाल सिन्हा ने कहा कि सदियों से जम्मू आध्यात्मिक जागरुकता, सांस्कृतिक समृद्धि और ज्ञान के केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। अपने प्राचीन मंदिरों के साथ यह भूमि लंबे समय से आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय संस्कृति के बेहतरीन मूल्यों का प्रतीक रही है। यह देखकर खुशी होती है कि जम्मू उस खास पहचान को फिर से हासिल कर रहा है जिसके लिए इतिहास में इसकी सराहना की गई है। उन्होंने कहा, ”मैं शहर को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखने के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करता हूं। ”

उन्होंने तवी रिवरफ्रंट बनाने और नदी को सामुदायिक जीवन के केंद्र में उसका सही स्थान दिलाने के लिए जम्मू स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जो किनारे कभी उपेक्षित थे, वे अब संस्कृति, परंपरा, सामाजिक मेलजोल और आध्यात्मिक मूल्यों के जीवंत केंद्र बन गए हैं। सिन्हा ने कहा कि नदी का बिना रुकावट बहता पानी हमें याद दिलाता है कि जिस तरह उसका जल बिना किसी भेदभाव के आजादी से बहता है, उसी तरह इंसानी जिंदगी भी प्यार, सहयोग और आपसी सम्मान से चलनी चाहिए।

मनोज सिन्हा ने कहा, ” अमरनाथ यात्रा के दौरान हर शाम तवी आरती की जाएगी और जलाया गया हर दीया उम्मीद, पवित्रता, नई शुरुआत और आस्था की रोशनी फैलाएगा। यह न सिर्फ तीर्थयात्रियों का रास्ता रोशन करेगा, बल्कि हमारे समाज की भावना को भी रोशन करेगा। ”

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