लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2700 करोड़ रुपये के पुष्टाहार (Take Home Ration) टेंडर को लेकर विवाद बढ़ गया है। दागी, ब्लैकलिस्टेड और एफआईआर वाली कंपनियों को टेंडर दिए जाने, कार्टलाइजेशन और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। टेंडर मिलने के दो महीने बाद भी पुष्टाहार आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंचा है, जिससे लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर असर पड़ रहा है। भाजपा एमएलसी की शिकायत के बाद पुष्टाहार विभाग ने नेफेड से स्पष्टीकरण मांगा है।
गंभीर आरोप
– दागी और ब्लैकलिस्ट कंपनियों को टेंडर देने का आरोप
– एफआईआर वाली कंपनी को पुष्टाहार सप्लाई का बड़ा ठेका
– कई कंपनियां सिर्फ पैकेजिंग करती हैं, उत्पादन यूनिट नहीं रखतीं
– टेंडर प्रक्रिया में कार्टलाइजेशन (गठजोड़) के आरोप
इन गंभीर आरोपों के चलते टेंडर की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सप्लाई में भारी देरी
टेंडर फाइनल होने के दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। इससे Integrated Child Development Services (ICDS) के तहत पोषण प्राप्त करने वाले लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर संकट पैदा हो गया है।
भाजपा एमएलसी की शिकायत पर एक्शन
भाजपा एमएलसी की लिखित शिकायत के बाद विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और नेफेड से विस्तृत जवाब मांगा है। विभाग ने निम्नलिखित मुद्दों पर स्पष्टीकरण तलब किया है:
– कंपनियों की चयन प्रक्रिया
– ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को टेंडर देने का आधार
– उत्पादन क्षमता की जांच
– जियो-टैगिंग और वास्तविक डिलीवरी की स्थिति
जांच की मांग तेज
विपक्ष समेत कई संगठनों ने मांग की है कि टेंडर में शामिल सभी कंपनियों की जमीनी जांच हो। विशेष रूप से उत्पादन यूनिट न रखने वाली केवल पैकेजिंग कंपनियों को दिए गए ठेकों की स्क्रूटनी की जाए।
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