Homeउत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)महराजगंज विधायक का अनोखा गणित—UP में बना दिए 98 जिले!

महराजगंज विधायक का अनोखा गणित—UP में बना दिए 98 जिले!

रिपोर्ट:गजेंद्र गुप्त।

महराजगंज। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तैयारियाँ और नेताओं के ‘अद्भुत भाषण’ अभी से सुर्खियों में आने लगे हैं। प्रदेश भर में जारी बूथ सम्मेलनों की कड़ी में महराजगंज में आयोजित एक कार्यक्रम अचानक चुनावी तैयारियों से ज्यादा विधायक जी के ‘जनरल नॉलेज’ को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।

सदर विधानसभा क्षेत्र से कई बार के विधायक जय मंगल कनौजिया द्वारा आयोजित इस बूथ सम्मेलन में कार्यकर्ताओं के लिए मटन पार्टी का भरपूर इंतज़ाम किया गया था। सैकड़ों की संख्या में पहुँचे कार्यकर्ताओं ने ज़ायदेदार दावत का लुत्फ तो लिया, लेकिन मंच से विधायक जी ने जो ‘ज्ञान की गंगा’ बहाई, उसने वहाँ मौजूद हर शख्स को हैरत में डाल दिया।

विधायक जी का अनोखा भूगोल: 75 नहीं, 98 जिलों वाला UP!

अपने भाषण के दौरान कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते-बढ़ाते माननीय विधायक जी इतने बहक गए कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के भूगोल का ही नया नक्शा खींच दिया। विधायक जय मंगल कनौजिया ने बड़े ही विश्वास के साथ दावा कर डाला कि:

> “उत्तर प्रदेश के सभी 98 जिलों में बूथ सम्मेलन का भव्य कार्यक्रम रखा गया है…”

यह सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। जिस प्रदेश में दशकों से कुल 75 प्रशासनिक जिले हैं, वहाँ कानून बनाने की ज़िम्मेदारी संभालने वाले एक वरिष्ठ विधायक द्वारा प्रदेश को ’98 जिलों’ का बता देना, हँसी का पात्र बनने के साथ-साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।

मटन का स्वाद और ज्ञान की बात: क्या यही है जनप्रतिनिधियों का स्तर?

कार्यक्रम के दौरान यह चर्चा ज़ोरों पर रही कि कानून बनाने वाले को ही ‘भूगोल’ का ज्ञान नहीं जो जनप्रतिनिधि विधानसभा की पावन पीठ पर बैठकर पूरे प्रदेश के लिए नियम और कानून तय करते हैं, उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके अपने राज्य में आखिर कुल कितने जनपद हैं। सम्मेलन में आए कार्यकर्ता जहाँ एक तरफ मटन पार्टी के ज़ायक़े का आनंद ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ विधायक जी के इस बयान पर दबी ज़बान में ठहाके लगाते नज़र आए।

राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई भारी आलोचना।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बयान अब आग की तरह फैल रहा है। विपक्षी दल जहाँ इसे ‘सत्ता के नशे में ज़मीनी हकीकत से बेख़बर होना’ बता रहे हैं, वहीं आम जनता भी सोशल मीडिया पर विधायक जी के इस भाषण का जमकर मज़ाक उड़ा रही है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या चुनाव जीतने और कई बार विधायक बनने के बाद भी बुनियादी जानकारी का अभाव होना सार्वजनिक जीवन में स्वीकार्य है? या फिर दावत के शोर में विधायक जी अपनी ही सरकार के आंकड़ों को भूल बैठे।

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