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7 से 8 घंटे की नींद के बाद भी क्यों महसूस होती है थकान?


हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे तक सोना चाहिए। नियमित मात्रा में नींद लेने से शरीर स्वस्थ रहता है। कई लोग इस सलाह को मानते हैं कि इसके बावजूद थका हुआ महसूस करते हैं। आलर्म बजते ही हम उठ तो जाते हैं लेकिन दिमाग सुस्त महसूस करता है। ऐसा लगता है कि शरीर को बिल्कुल भी आराम नहीं मिला है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं। नींद की गुणवत्ता का हमारा सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि कारणों से नींद पर प्रभाव पड़ता है।

 

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 क्यों महसूस होती है थकान?

थायराइड इंबैलेंस

 

थायराइड ग्लैंड हमारे गले में पाया जाता है जो शरीर में एनर्जी को बनाएं रखने में मदद करता है। जब थायराइड एक्टिव नहीं होता है तो उसे हाइपोथायरडिज्म कहा जाता है। इस दौरान शरीर में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है।

 

लक्षण

  • लगातार थकान
  • एकदम से वजन बढ़ना
  • ठंडक महसूस होना

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक हाइपोथायराडिज्म शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और पर्याप्त नींद के बाद भी थकान महसूस होती है।

विटामिन की कमी

विटामिन की कमी की वजह से भी शरीर में एनर्जी महसूस नहीं होती है। जब शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी होती है तब शरीर भोजन का इस्तेमाल एनर्जी बनाने के लिए करता है।

 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन डी की कमी
आयरन की कमी

 

विटामिन बी12 रेड ब्लड सेल्स को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में खून की कमी के कारण ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नसों में नहीं पहुंचेगा। इस वजह से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। विटामिन डी की कमी की वजह से इम्यून फंक्शन भी प्रभावित होता है। इसकी कमी के कारण थकान महसूस होती है। 

 

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तनाव बढ़ना

नींद की कमी सिर्फ शरीर को ही नहीं दिमाग को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है तो दिमाग नींद के दौरान भी सतर्क रहता है। शरीर शारीरिक रूप से आराम कर सकता है लेकिन मन चिंताओं और तनाव से भरा रहता है। अधिक तनाव की वजह से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ता है।

इन आदतों से नींद पर पड़ता है प्रभाव

  • रात को देर तक फोन चलाना।
  • रात को अधिक खाना खा लेना।
  • अनियमिक स्लीप शेड्यूल
  • अधिक मात्रा में कॉफी पीना

नींद को कैसे बेहतर करें?

  • टाइम से सोना। 
  • रात को सोने से आधे घंटे पहले फोन बंद कर दें।
  • सुबह उठकर नियमित मात्रा में एक्सरसाइज करें।
  • रात को कॉफी या चाय का सेवन करने से बचें।

18 या 19, कब से शुरू हो रही है नवरात्रि? सही तारीख जान लीजिए


अगर आप चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तारीख को लेकर परेशान हैं तो अब सारा भ्रम दूर कर लीजिए। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होने जा रही है। खास बात यह है कि इसी दिन से हिंदू कैलेंडर का नया साल (विक्रम संवत 2083) भी शुरू होगा। होली बीतते ही लोग अब माता रानी के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का सबसे बड़ा महत्व है और माना जाता है कि अगर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए, तो माता रानी की विशेष कृपा मिलती है।

 

नवरात्रि का पहले दिन कलश स्थापना, सबसे अहम है। इसे आसान भाषा में मां दुर्गा को अपने घर बुलाने का तरीका माना जाता है। इस बार 19 मार्च को कलश रखने के लिए दो अच्छे समय हैं। सुबह का मुहूर्त 6:11 बजे से 8:35 बजे तक है। अगर आप सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पाते है, तो दोपहर में ‘अभिजीत मुहूर्त’ सबसे बढ़िया है। इसका समय 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। नवरात्रि की पहली तिथि 18 मार्च की रात 9:34 बजे से शुरू होगी और 19 मार्च की रात 10:15 बजे खत्म होगी।

 

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कलश स्थापना क्यों की जाती है?

कलश स्थापना नवरात्रि का सबसे जरूरी हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को पूरे ब्रह्मांड का रुप माना जाता है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसे स्थापित करने का अर्थ है मां दुर्गा का अपने घर में आदर के साथ स्वागत करना और उन्हें नौ दिनों तक विराजमान होने की प्रार्थना करना। कलश को सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रखना चाहिए।

पालकी पर बैठकर आएंगी मां दुर्गा

हर बार की तरह इस बार भी लोग जानना चाहते हैं कि माता रानी किस सवारी पर आएंगी। क्योंकि इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा ‘पालकी'(डोली) पर बैठकर आ रही हैं। ज्योतिष के अनुसार, पालकी पर आना खुशहाली तो लगता ही है, साथ ही यह शांति और सावधानी से काम लेने का इशारा भी है। वहीं जब नवरात्रि खत्म होगी, तो मां ‘हाथी’ पर सवार होकर विदा होंगी। हाथी पर विदाई को अच्छी बारिश और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।

 

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पूजा के वक्त इन बातों का रखें ध्यान 

शास्त्रों की मानें तो कलश हमेशा शुभ समय देखकर ही बैठना चाहिए। पूजा करते समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग जैसे समय का ध्यान रखें और इनसे बचें। कलश को पूरे संसार का रुप माना जाता है जिसमें सारे देवी-देवता बसते है। इसलिए इसे पूरी सफाई और नियम के साथ स्थापित करें। चैत्र महीने की ये नवरात्रि न सिर्फ भक्ति का पर्व है, बल्कि यह नए साल की नई शुरुआत का भी संदेश देती है।

ईरान में जंग, खाड़ी पर असर, बढ़ रहा LPG संकट, किसके पास कितना स्टॉक?


मिडिल ईस्ट में ईरान,इजरायल और अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बाधित होने का असर अब दक्षिण एशिया के देशों में LPG और ईंधन संकट के रूप में दिखने लगा है। भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान और पाकिस्तान जैसे देश मिडिल ईस्ट से तेल और LPG आयात पर निर्भर हैं। इसलिए सप्लाई बाधित होते ही इन देशों में गैस स्टॉक तेजी से घटने लगा है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई होती है और इसके बाधित होने से एशिया के आयातक देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। कई देशों ने ईंधन बचाने के लिए स्कूल बंद, वर्क फ्रॉम होम, गैस राशनिंग और पावर कट जैसे कदम उठाए हैं।

 

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भारत की स्थिति

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल LPG मांग का लगभग 55-60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से अधिकांश सऊदी अरब, कतर और UAE से आता है। द गार्डियन में दिल्ली स्थित थिंक टैंक ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स के अख्तर मलिक ने बातया कि भारत ने रणनीतिक कच्चे तेल के भंडार तो बनाए लेकिन LPG के लिए वैसे बफर नहीं बनाए। उन्होंने आगे कहा, ‘वैश्विक स्तर पर, ऊर्जा प्रणालियां आमतौर पर जरूरी ईंधनों के लिए 40 से 60 दिनों का रिजर्व कवर रखती हैं। इसके विपरीत, भारत के पास LPG का भंडारण 20 दिनों से कुछ ही ज़्यादा है, मौजूदा संकट जितना सप्लाई में रुकावट की वजह से है, उतना ही योजना बनाने में कमी की वजह से भी है।’

पड़ोसी देशों में हाहाकार

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपे एक रिपोर्ट के मुताबकि पाकिस्तान में नौ दिनों के लिए LPG और 14 दिनों के लिए जेट ईंधन बचे हैं। द मोर्निंद में छपे एक रिपोर्ट में बताया गया कि श्रीलंका में प्रतिदिन 1,000-1,200 मीट्रिक टन LPG की मांग है, लेकिन भंडारण क्षमता केवल एक सप्ताह की आपूर्ति के बराबर है। लिट्रो गैस लंका के चेयरमैन गुणवर्धना ने बताया कि श्रीलंका को हर दो दिन में 8,000 मीट्रिक टन की खेप मालदीव में खड़े बड़े LPG पोत से छोटे जहाजों में लानी पड़ रही है।

 

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कई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि बांग्लादेश के पास कुछ हफ्तों का LPG स्टॉक है। नेपाल LPG के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है, इसलिए अब उसके पास LPG की सप्लाई सीमित है। LPG कमी के कारण नेपाल ने राशनिंग शुरू कर दी है। भूटान भी पूरी तरह से LPG के लिए भारत पर निर्भर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक भूटान भारत के साथ MoU के कारण सप्लाई जारी, पर कीमतों में भारी उछाल। भूटान में भी कुछ हफ्तों का ही LPG स्टॉक है।

कई देशों में स्कूल बंद, वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीलंका में ईंधन और गैस स्टॉक बचाने के लिए 4 दिन का वर्क वीक लागू किया गया है और ईंधन राशनिंग भी की जा रही है। बांग्लादेश में यूनिवर्सिटी बंद कर दी गई हैं और सजावट वाली लाइटों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। पाकिस्तान में लों की छुट्टी कर दी गई है और लोगों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को कहा गया है ताकि पेट्रोल-डीजल बचाया जा सके। नेपाल में आधा भरा हुआ’ सिलेंडर बांट रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गैस पहुंच सके।

महिलाओं के लिए 273 सीटें, UP-बिहार से 180 MP, लोकसभा में क्या-क्या बदलेगा?


संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। अब चर्चा तेज हो गई है कि महिलाओं के लिए संसद में एक तिहाई आरक्षण लागू करवाने के लिए इसी सत्र में बिल लाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और लोकसभा सांसदों की कुल संख्या 816 हो जाएगी। नए फॉर्मूले के मुताबिक, हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। उत्तर प्रदेश में फिलहाल लोकसभा की 80 सीटें हैं और ये बढ़कर 120 हो सकती हैं। इसी तरह बिहार में जो 40 सीटें हैं वे बढ़कर 120 हो जाएंगी। दक्षिण के राज्यों की चिंता भी खत्म हो सकती है क्योंकि वहां भी सीटों की संख्या इसी अनुपात में बढ़ेगी।

 

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम सहमति पर पहुंचने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। सूत्रों ने बताया कि यदि आम सहमति बन जाती है तो दोनों विधेयक इसी सप्ताह पेश किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में शामिल होने वाले विपक्षी नेताओं में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पी वी मिधुन रेड्डी, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मनोज झा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM)असदुद्दीन ओवैसी के शामिल थे। अमित शाह आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।

 

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कहां, कितनी सीटें बढ़ेंगी?

 

फिलहाल, अनुमान के आधार पर ही सीटों की संख्या बताई गई है लेकिन माना जा रहा है कि यही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। इस फॉर्मूले के तहत हर राज्य में सीटों की संख्या मौजूदा संख्या से डेढ़ गुना ज्यादा हो सकती है। इसी अनुपात में दक्षिण भारत के राज्यों में भी इजाफा हो सकता है। आंध्र प्रदेश में अभी 25 सीटे हैं जो बढ़कर 38 हो सकती हैं। इसी तरह तेलंगाना में 17 से 26, तमिलनाडु से 39 से 59, केरल में 20 से 30, कर्नाटक में 28 से 42 और ओडिशा में 21 से 32 सीटें हो गई जाएंगी।

 

इसी तरह उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120, बिहार में 40 से बढ़कर 60, पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 63 और राजस्थान में 25 से बढ़कर 38 सीटें हो सकती हैं। दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेश में सीटें स्थिर रहेंगी। दिल्ली में 7  से बढ़कर 11 लोकसभा सीटें हो सकती हैं।


कब  से लागू होगा आरक्षण?

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा। मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के साथ वर्टिकल बेस पर किया जाएगा। राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जहां सीटों का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।

 

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कहा जा रहा है कि संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम में भी बदलाव करेगा। वहीं, दूसरी ओर एक अन्य साधारण विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा। संसद से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू हो जाएंगे और लोकसभा के अलावा ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में सीट के आरक्षण में मदद करेंगे। सूत्रों ने बताया कि परिसीमन या सीमा आयोग एक ‘निष्पक्ष’ निकाय है जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसके फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

कितने साल के लिए होगा महिला आरक्षण?

 

एक सरकारी पदाधिकारी ने बताया, ‘ज्यादा से ज्यादा यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।’ परिसीमन प्रक्रिया के अलावा, उन निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है जिन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना है, जैसा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है। इस प्रकार निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण का निर्धारण करने का एक अन्य तरीका ‘रोटेशन’ प्रक्रिया हो सकती है। सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है।

 

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यह अधिनियम अब तक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है। महिला आरक्षण विधेयक पारित कराते समय सरकार ने कहा था कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन प्रक्रिया से महिलाओं के लिए आरक्षित की जाने वाली विशेष सीटों का पता चल जाएगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण 15 वर्षों तक जारी रहेगा और संसद बाद में इस लाभ की अवधि को बढ़ा सकती है।

पूरी तरह से लड़की बनीं अनाया बांगर, वैजिनोप्लास्टी सर्जरी करवाई, क्या होता है?


पूर्व क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया अब पूरी तरह से लड़की बन गई हैं। उन्होंने हाल ही में बताया था कि वह बैंकॉक में जेंडर अफर्मिंग सर्जरी करवाने वाली हैं। इस प्रक्रिया में वजाइना को क्रिएट किया जाता है। सोशल मीडिया पर वैजिनोप्लास्टी को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। आइए जानते हैं इस सर्जरी की जरूरत किन लोगों को पड़ती है? इस सर्जरी को करवाने में कितना खर्च आता है?

 

वैजिनोप्लास्टी में सर्जरी के जरिए वजाइना को बनाया जाता है। अगर वैजाइना ठीक से नहीं बनी है तो यह सर्जरी करवाने की जरूरत पड़ती है। इस सर्जरी को ट्रांसजेंडर महिलाएं भी करवाती हैं जिससे उनके शरीर में सर्जरी की मदद से वजाइना बनाया जाता है। कुछ महिलाओं में जन्म से ही वैजाइना ठीक से डेवलप नहीं होता है वे भी वैजिनोप्लास्टी करवाते हैं। यह एक लंबी प्रकिया है। इस प्रकिया में प्राइवेट पार्ट की त्वचा को वजाइना का रूप दिया जाता है।  इस सर्जरी के बाद दवाइयां चलती हैं और मरीज को ठीक होने में कुछ हफ्तों का समय लग जाता है।

 

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वैजिनोप्लास्टी कितने प्रकार का होता है?

वैजिनोप्लास्टी अलग-अलग कारणों से होती है। इसके कई प्रकार हैं।

  • रिकंस्ट्रक्टिव वैजिनोप्लास्टी- अगर किसी महिला की योनी में जन्मजात दिक्कत है या खराब संरचना हो गई है तो शरीर के दूसरे अंगों से स्किन लेकर उसे ठीक किया जाता है।
  • कॉस्मेटिक वैजिनोप्लास्टी- महिलाओं में उम्र बढ़ने या डिलीवरी के बाद वैजाइना में ढीलापन आ जाता है। इस प्रकिया की मदद से योनी में कसावट को बनाया जाता है। 
  • जेंडर अफर्मिंग वैजिनोप्लास्टी- इस सर्जरी में योनी का निर्माण किया जाता है। अनाया बांगर ने हाल ही में यही सर्जरी करवाई है। उनकी सर्जरी सफल रही थी।
  • वल्वोपलास्टी- इसमें योनी के ऊपरी भाग को बनाया जाता है। गहराई वाले भागों को नहीं बनाया जाता है।

सर्जरी से पहले कौन से चेकअप किए जाते हैं?

  • सबसे पहले मरीज का फिजिक्ल टेस्ट, बायोमेट्रिक और ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • डॉक्टर मरीज को सभी प्रकार के रिस्क के बारे में जानकारी देता है।
  • इस सर्जरी से पहले हार्मोन थेरेपी कराने की सलाह दी जाती है।
  • सिगरेट, शराब और कुछ दवाइयों को नहीं लेने की सलाह दी जाती है।

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वैजिनोप्लास्टी सर्जरी के बाद क्या रिस्क होते हैं?

वैजिनोप्लस्टी करवाने के बाद रिस्क फैक्टर्स बढ़ जाते हैं। Cleveland Clinic के मुताबिक वैजिनोप्लास्टी के बाद इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग जल्दी रिकवर कर जाते हैं। कुछ लोगों को समय लगता है।

  • सर्जरी के बाद इंफेक्शन और ब्लड फ्लो का खतरा बढ़ सकता है।
  • सूजन और दर्द की समस्या।

कितना खर्च आता है?

वैजिनोप्लास्टी की सर्जरी का खर्च डॉक्टर के अनुभव, केस की जटिलता और किस जगह पर हो रहा है? इन सभी बातों पर निर्भर करता है। इस सर्जरी में 3 से 10 लाख तक का खर्च आता है। इस तरह की सर्जरी की क्वालिफाइड प्लास्टिक सर्जन से ही करवाएं।

 

कम पैसे में कैसे करें बद्रीनाथ धाम की यात्रा? तरीका जानिए


बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। बद्रीनाथ में यात्रा करने दूर-दूर से लोग आते हैं, क्योंकि यह चार धामों में से एक है। कई लोग ऐसे भी हैं जो आर्थिक तंगी की वजह से बद्रीनाथ यात्रा नहीं कर पाते हैं। उन लोगों के लिए बद्रीनाथ की यात्रा केवल एक सपना बनकर रह जाती है।

 

कई लोगों को लगता है कि बद्रीनाथ की यात्रा करने में आराम से 10,000 रुपये लग जाएंगे। हालांकि कम पैसों में भी बद्रीनाथ की यात्रा की जा सकती है। अब सवाल उठता है कि कम पैसों में बद्रीनाथ की यात्रा कैसे हो पाएगी।

 

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कम बजट में कैसे करें यात्रा?

दिल्ली से बद्रीनाथ धाम लगभग 516 किलोमीटर दूर है, जहां कई लोग कार से जाते हैं। अगर हम बस से जाएं तो 700 से 1200 रुपये देकर बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं। इसके बाद बद्रीनाथ पहुंचने के बाद धर्मशाला में ठहर सकते हैं, साथ ही भंडारे में भोजन कर सकते हैं। इससे व्यक्ति कम पैसों में ही सफल यात्रा कर सकता है।

कैसे जाएं?

दिल्ली से बद्रीनाथ सड़क के रास्ते जाने में लगभग 14 से 15 घंटे लगते हैं। अगर बजट कम है तो बस से बद्रीनाथ जाना सबसे सही विकल्प है। दिल्ली से बद्रीनाथ बस से जाने पर केवल 700-1200 रुपये खर्च होंगे, जबकि कैब से जाने पर लगभग 6000 से 16000 रुपये तक लग सकते हैं।


दिल्ली से बद्रीनाथ जाने के लिए हमें दिल्ली के कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) जाना होगा। उसके बाद ISBT पर जाकर बद्रीनाथ की टिकट बुक करनी होगी। फिर समय के अनुसार बस के जरिए बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं।

 

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होटल की जगह धर्मशाला में ठहरें

बद्रीनाथ मंदिर के पास कई धर्मशालाएं हैं, जहां रहने का किराया बड़े होटलों की तुलना में बहुत कम होता है। बद्रीनाथ मंदिर के पास भवन आश्रम, बंगुर भवन और जालाराम आश्रम नाम की धर्मशालाएं हैं। इन आश्रमों का किराया 500 से 1500 रुपये के बीच हो सकता है। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ घूमने आए लोगों के लिए सस्ती होटल सुविधा भी दी है, जो प्राइवेट होटल की तुलना में कम कीमत में मिलती है।


GMVN यात्री निवास- यह उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाया गया है। जीएमवीएन यात्री निवास में अक्सर लोग एक रात के लिए ठहर सकते हैं। यहां लोगों को रात का भोजन भी दिया जाता है। यहां रहने का प्रतिव्यक्ति खर्च लगभग 600-700 रुपये होता है।

खाना कहां खाएं?

बद्रीनाथ धाम में कई संस्थान भंडारा करते हैं, जहां जाकर लोग भोजन कर सकते हैं और अपनी इच्छा के अनुसार दान पेटी में रुपये दे सकते हैं। हालांकि भंडारे में भोजन निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

24 दिनों की जंग, सिर्फ तबाही, ईरान से जंग हारे ट्रंप-नेतन्याहू? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका, इजरायल और ईरान की जंग थम नहीं रही है। 24 दिनों बाद भी हालात वैसे ही हैं, जैसे 28 फरवरी को जंग के पहले दिन थे। इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं, जवाब में ईरान येरुशलम और खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को तबाह कर रहा है। अब ईरान, खाड़ी के देशों में मोजूद पेट्रोलियम संसाधनों को खत्म करने की योजना बना रहा है। यह जंग, अब डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि खत्म हो, निर्णायक फैसला हो, इजरायल की दूर-दूर तक ऐसी मंशा नहीं हैं।

ईरान ने लगातार  इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और पड़ोसी देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए हैं। इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, खाड़ी में तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। मध्य पूर्व में असुरक्षा अपने चरम पर है। अमेरिकी सैनिकों और आम  नागरिकों की भी मौत हुई है। 24 घंटे में जंग खत्म कर ‘सत्ता व्यवस्था’ बदलने का दावा करने वाले ट्रंप, 23 दिन बाद भी जंग नहीं खत्म कर पाए हैं, न ही अगले 23 दिनों में ऐसा होता नजर आ रहा है। 

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अमेरिका में महंगा हो गया तेल

अमेरिका ने युद्ध जल्द खत्म करने की बात कही है, लेकिन इजरायल ज्यादा हमले जारी रखना चाहता है। तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल महंगा हो गया है। अमेरिका इस जंग में अपनों की नाराजगी झेल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

ट्रंप जल्द युद्ध खत्म करना चाहते हैं, इजरायल नहीं

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन उन्होंने कोई साफ समयसीमा नहीं बताई। इजरायल ने कहा है कि वह ईरान पर और ज्यादा हमले बढ़ाएगा। इजरायल लेबनान बॉर्डर से हिजबुल्लाह को भी हटाने की कोशिश कर रहा है, जिससे लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं। अमेरिका उसमें भी सीधे शामिल नहीं है। इजरायल, जंग जारी रखना चाहता है, डोनाल्ड ट्रंप, अब खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।

मसूद पेजेश्कियन, राष्ट्रपति, ईरान:-
ईरान को दुनिया के मानचित्र से मिटाने का भ्रम एक इतिहास रचने वाले राष्ट्र की इच्छा के खिलाफ हताशा को दिखा रहा है। धमकियां और आतंक केवल हमारी एकता को मजबूत करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट उन लोगों को छोड़कर सभी के लिए खुला है, जो घुसपैठ करते हैं। हम युद्ध के मैदान में इन बेबुनियाद धमकियों का मजबूती से सामना करेंगे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं अमेरिका। Photo Credit: PTI

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तेल और गैस ठिकाने हो रहे हैं तबाह

अमेरिका और इजरायल ने ईरान की तेल और गैस प्लांट पर हमले शुरू किए हैं। साउथ पार्स गैस फील्ड को इजरायल ने तबाह किया है। ईरान ने जवाब में कतर समेत अन्य देशों की एनर्जी साइट्स पर हमले किए हैं। इससे दुनिया में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। अमेरिका ने कुछ ईरानी तेल पर पाबंदी हटाने की बात कही है, जिससे कीमतें कम हों

अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर 200 अरब डॉलर का बोझ

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब जंग के लिए अमेरिका को कांग्रेस से 200 अरब डॉलर अतिरिक्त मांगने पड़ेंगे। राष्ट्रीय कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने यहां तक कहा है कि बुरे लोगों को मारने के लिए पैसा लगता है।

खाड़ी के देशों में नहीं थम रही है तबाही। Photo Credit: PTI

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ईरान की सेना तबाह, सरकार बरकरार

अमेरिका-इजरायल ने दावा किया है कि ईरान की मिसाइल, एयर फोर्स और नेवी ज्यादातर नष्ट हो चुकी है। हजारों टारगेट हिट किए गए, कई जहाज डुबोए गए। ईरान की सरकार अभी भी चल रही है। नए सुप्रीम लीडर के तौर पर खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना गया है। वह सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। अमेरिका का दावा है कि वह जख्मी हो चुके हैं। 

ईरान, तेल डिप्लोमेसी से अमेरिका को हराएगा?

ईरान ने होर्मुज ब्लॉक करने की कोशिश की, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है। ईरान ने कई तेल टैंकरों पर हमले किए। इससे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। अमेरिका में गैस की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। इस जंग से अमेरिका भी परेशान है और भारत जैसे देश भी।

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ईरान ने पड़ोसियों पर भी हमले किए

ईरान ने सिर्फ अमेरिका-इजरायल पर नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे कई पड़ोसी देशों पर ड्रोन-मिसाइल हमले किए। इससे खाड़ी के देशों में बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिका के प्रति भरोसा भी कम हुआ है।

दुबई के एयरपोर्ट तक, ईरान के निशाने पर हैं। Photo Credit: PTI

अमेरिकी सैनिकों की मौत और ग्राउंड फोर्स

कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले से 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए, इराक में एक रिफ्यूलिंग प्लेन क्रैश से 6 और मौतें हुईं हैं। अमेरिका ने कहा है कि यह सिर्फ हवाई जंग हो रही है लेकिन अब मरीन यूनिट्स भेजी जा रही हैं। ट्रंप ने जमीन पर सैनिक नहीं भेजने की बात कही है। हालात ऐसे ही रहे तो उन्हें अपनी सेना उतारनी पड़ सकती है। 

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अमेरिका अकेला, इजरायल नाकाम, क्या-क्या हुआ?

डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और अन्य देशों से होर्मुज में मदद मांगी, लेकिन किसी ने अमेरिका की मदद करने की नहीं ठानी। कई देशों ने अमेरिका का प्रस्ताव ही ठुकरा दिया। डोनालड् ट्रंप ने इन देशों को कायर कहा है। इजरायल भी कमजोर हुआ है लेकिन अकेले ही जंग जारी रखने की बात दोहरा चुका है। बेंजामिन नेतन्याहू ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। उन्हें कामयाबी नहीं मिली है।

रूस के तेल से प्रतिबंध हटा रहे ट्रंप

जंग का असर ऐसा हुआ है कि अमेरिका, रूसी तेल से प्रतिबंध हटा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक भी अमेरिका ने टाल दी है। 

धर्म बदला तो SC/ST का लाभ नहीं मिलेगा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब क्या है?


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर आप हिंदू धर्म छोड़कर, ईसाई धर्म अपनाते हैं तो आपको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें यह साफ-साफ कहा गया था कि जो ईसाई धर्म को सक्रिय रूप से मान रहा है, आस्था रख रहा है, उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के व्यक्तिगत कानून, हिंदू कानूनों के अंतर्गत ही आते हैं। हिंदू विवाद अधिनयम, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम इन चार धर्मों पर लागू होते हैं। 

सु्प्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति, जो हिंदू, सिख और बौद्ध नहीं है, अगर वह धर्म परिवर्तन करता है, उसे अनुसूचित जाति के का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। किसी भी धर्म में जाना, अनुसूचित जाति के दर्जे को तत्काल खत्म करना है। ईसाई समुदाय के कुछ लोग, धर्म परिवर्तन के बाद भी अपने लिए अनुसूचित जनजाति का दर्ज मांगते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी दूसरे धर्म की जीवनशैली आप अपना चुके हैं तो आप अपने लिए अनुसूचित जाति या जनजाति के तहत आरक्षण और अन्य दर्जा नहीं मांग सकते हैं। 

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सुप्रीम कोर्ट:-
कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म का पालन नहीं कर रहा है, उसे अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इनके इतर किसी भी धर्म का पालन करने पर, अनुसूचित जाति या जनजाति का दर्जा तत्काल और पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।  

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा है ऐसा?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने के दौरान कहा, ‘संविधान (अनुसूचित जाति) ऑर्डर 1950 में इसे स्पष्ट किया गया है। इस आदेश के तहत प्रतिबंध पूरी तरह से लागू है। किसी भी ऐसे धर्म में धर्म परिवर्तन करना, जिनका जिक्र, क्लॉज 3 में नहीं है, चाहे वह किसी भी अनुसूचित जाति में जन्मे हों, तत्काल उनका अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाएगा।’

 

कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म का पालन नहीं कर रहा है, उसे अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। इनके इतर किसी भी धर्म का पालन करने पर, अनुसूचित जाति या जनजाति का दर्जा तत्काल और पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। यह प्रतिबंध पूरी तरह से लागू है, कोई अपवाद नहीं है। एक व्यक्ति, एक साथ क्लॉज 3 में उल्लिखत धर्मों से अलग, किसी धर्म का पालन करता है और चाहता है कि अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, नहीं दिया जा सकता है।’

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क्यों यह आदेश आया है?

एक शख्स हिंदू से ईसाई बन गया था। वह पादरी के तौर पर अपनी सेवाएं भी दे रहा था। उस शख्स ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कराया था। उसने SC-ST एक्ट के तहत अपने लिए संरक्षण मांगा था। आरोपी ने इसे चुनौती दी थी। आरोपी ने अपनी याचिका में कहा था कि यह व्यक्ति, ईसाई धर्म का पालन करता है, इस पर कैसे SC/ST एक्ट लागू हो सकता है। 

30 अप्रैल 2025 को ‘चिंतहादा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य’ में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा था कि ईसाई धर्म, जात-पात में यकीन नहीं करता है, न ही इस धर्म का हिस्सा है। इसलिए SC/ST एक्ट नहीं लगाया जा सकता है। जस्टिस हरिनाथ एन ने आरोपी पर लगाए गए चार्ज को हटा दिया था। इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने एक और विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। 

प्रियंका हों या काइली जेनर, सबको पसंद हीरा, सोने का क्रेज खत्म?


अक्सर लोग अपने फेवरेट सेलिब्रिटी के ड्रेसिंग स्टाइल और फैशन को देखकर प्रभावित होते हैं। आजकल ज्यादातर सेलिब्रिटी हीरे के गहने पहने नजर आ रहे हैं। चाहे प्रियंका हों या काइली जेनर, सभी सोने के गहनों की बजाय हीरे के गहने पहने नजर आ रही हैं। अब सवाल उठता है कि क्या इन सेलिब्रिटीज का गहनों के प्रति रुझान बदलता जा रहा है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या इन सेलिब्रिटीज के हीरा पहनने से गोल्ड के गहनों का ट्रेंड खत्म हो जाएगा।


2026 के गोल्डन ग्लोब्स अवॉर्ड में प्रियंका चोपड़ा से लेकर काइली जेनर जैसी हस्तियां रेड कार्पेट पर शानदार कपड़ों और बेहतरीन हीरे की जूलरी पहने नजर आई थीं। इस इवेंट में प्रियंका चोपड़ा डायर का गाउन पहने नजर आई थीं। इसके अलावा उन्होंने बुल्गारी का हीरे और नीलम का हार पहना था, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

 

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वहीं काइली जेनर ने इस अवॉर्ड नाइट में शैम्पेन रंग के शानदार कस्टम-मेड गाउन में शिरकत की थी, उन्होंने लॉरेन श्वार्ट्ज के 75 कैरेट के विशाल हीरे के झुमकों के साथ स्टाइल किया था। इनके अलावा कई सेलिब्रिटी सिर्फ हीरे की जूलरी पहने नजर आई थीं। अब सवाल उठता है कि आज सेलिब्रिटी सोने से ज्यादा हीरे की जूलरी पहनना क्यों पसंद कर रही हैं।

 

 हीरा पहनने की क्या है वजह?

 

लुक को बेहतर बनाना – हीरा किसी भी रंग की ड्रेस के साथ मैच हो जाता है। चाहे वह भारी ड्रेस हो या सिंपल ड्रेस, हीरे की जूलरी लुक को और बेहतर बना देती है।


अंतरराष्ट्रीय फैशन ट्रेंड – भारतीय हस्तियां अब अंतरराष्ट्रीय फैशन रुझानों की ओर बढ़ती जा रही हैं, जहां डायमंड नेकलेस या स्टड अंगूठियां बहुत लोकप्रिय हो रही हैं।


लैब-ग्रोन हीरों की वजह से – लैब-ग्रोन डायमंड्स आने के कारण हीरे अब सोने से भी सस्ते दामों में मिल जाते हैं। इससे माना जा रहा है कि हीरे भी अब सेलिब्रिटी स्टैंडर्ड का हिस्सा बन गए हैं। हीरे के आभूषण चमकदार होते हैं, जिन्हें पहनते ही सेलिब्रिटी का लुक बेहद ग्लैमरस लगता है। अब सवाल उठता है कि क्या गोल्ड का चलन खत्म हो जाएगा।

 

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सोने का क्रेज खत्म?

आज के दौर में भले ही सेलिब्रिटी ज्यादा मात्रा में हीरे की जूलरी पहन रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोने का क्रेज लोगों के बीच खत्म हो गया है। आज भी लोग अपने पैसे सोना खरीदकर निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि सोने का दाम समय के साथ बढ़ता रहता है। भारत में शादियों और त्योहारों के समय गोल्ड की खरीदारी बढ़ जाती है। सोना आज भी ट्रेंड में है।

चमकेगा आपका भाग्य, मकर राशि में आ रहे चंद्रमा, राशिफल में बड़ा बदलाव


ग्रहों की स्थिति की अगर बात करें तो 15 मार्च 2026 रविवार का दिन बेहद खास है। चंद्रमा आज मकर राशि में गोचर कर रहे हैं, जो हमें अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर और व्यावहारिक रहने की प्रेरणा देता है। साथ ही, आज का मूलांक 6 है जिसका स्वामी सुख-सुविधाओं का कारक ‘शुक्र’ है। यह मेल आज के दिन को परिवार, करियर और रचनात्मक कार्यों के लिए बहुत शुभ बना रहा है।

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज का दिन सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहेगा। शुक्र और चंद्रमा की जुगलबंदी से रिलेशन में मिठास आएगा और आपकी महत्वाकांक्षाओं को नई उड़ान मिलेगी। आइए जानते हैं आपकी राशि के लिए आज के सितारे क्या बता रहे हैं और आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

 

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राशिफल और उपाय

मेष राशि

आज का दिन लीडर बनने का है। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां आपका इंतजार कर रही हैं।

क्या करें: नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करें। परिवार के साथ वक्त बिताएं। निवेश पर नजर रखें।

क्या न करें: पुरानी गलतियों पर बहस करने से बचें। फालतू खर्च न करें।

वृषभ राशि

आर्थिक रूप से आज का दिन काफी मजबूत है। आपको अचानक कहीं से धन का फायदा हो सकता है।

क्या करें: पुराने दोस्तों से मिलें, घर की सजावट करें। कुछ क्रिएटिव काम करें।

क्या न करें: किसी भी तरह के झगड़े में न पड़ें। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातचीत का तरीका लोगों को प्रभावित करेगा। नए संपर्क बनाने में मदद मिलेगी।

क्या करें: सोशल मीडिया और नेटवर्किंग पर समय दें। किसी ट्रिप का प्लान बनाएं।

क्या न करें: दूसरों की बुराई या अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।

कर्क राशि

घर-परिवार में आज सुख और शांति का माहौल रहेगा। मन में स्थिरता महसूस करेंगे।

क्या करें: माता-पिता का आशीर्वाद लें। घर से जुड़े काम निपटाएं।

क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई फैसला न करें। बीती बातों को याद न करें।

सिंह राशि

आज आप आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलते दिख रहे हैं।

क्या करें: बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस करें। अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए एक्सरसाइज करें।

क्या न करें: अपने भीतर अहंकार न आने दें। दूसरों की राय का सम्मान करें।

 

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कन्या राशि

आज आपकी बुद्धि और विश्लेषण करने की क्षमता आपको फायदा पहुंचाएगी। नौकरी में स्थिति बेहतर होगी।

क्या करें: पेंडिंग पड़े छोटे काम पूरे करें और अपनी सेहत की जांच करवाएं।

क्या न करें: हर काम में परफेक्शन ढूंढने के चक्कर में टेंशन न लें।

तुला राशि

प्रेम संबंधों के लिए आज का दिन बेहतरीन है। पार्टनर के साथ आपके रिश्ते और गहरे होंगे।

क्या करें: जीवनसाथी के साथ समय बिताएं। क्रिएटिव कामों में रुचि लें।

क्या न करें: कन्फ्यूजन में समय बर्बाद न करें। वाद-विवाद से दूर रहें।

वृश्चिक राशि

आज आपको गुप्त स्रोतों से लाभ मिल सकता है। पुरानी बीमारी से भी राहत मिलने के योग हैं।

क्या करें: गहराई से किसी विषय का अध्ययन करें। अपने निवेश की दोबारा जांच करें।

क्या न करें: मन में जलन या किसी के प्रति नेगेटिव विचार न आने दें।

धनु राशि

आज का दिन यात्रा और ज्ञान पाने के लिए बेहद अच्छा है। जीवन में कुछ पॉजीटिव बदलाव महसूस करेंगे।

क्या करें: धार्मिक या पढ़ाई-लिखाई से जुड़े काम करें। बाहर घूमने जाएं।

क्या न करें: जोश में आकर कोई बड़ा रिस्क न लें।

मकर राशि

आपकी ही राशि में चंद्रमा होने से आज आप खुद को ऊर्जा से भरा हुआ पाएंगे। आपके बड़े लक्ष्य पूरे हो सकते हैं।

क्या करें: अपने मुख्य टारगेट पर ध्यान लगाएं। परिवार को भी समय दें।

क्या न करें: अकेले न रहें। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।

कुंभ राशि

सामाजिक दायरे में आपकी सक्रियता बढ़ेगी। दोस्तों और मिलने-जुलने वालों से आपको फायदा हो सकता है।

क्या करें: ग्रुप मीटिंग्स में शामिल हों। खुलकर अपनी बात रखें।

क्या न करें: अकेले कोई बड़ा फैसला न लें। विवादित चर्चाओं से बचें।

मीन राशि

मानसिक शांति और आध्यात्मिकता के लिए आज का दिन श्रेष्ठ है। आपके देखे हुए सपने सच हो सकते हैं।

क्या करें: योग, ध्यान या पूजा-पाठ करें और कला के प्रति अपना रुझान बढ़ाएं।

क्या न करें: किसी भी तरह के भ्रम में न रहें और पैसों के मामले में लापरवाही न बरतें।

 

नोट: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और सकारात्मकता के साथ दिन का आनंद लें। 

ट्रक से भिड़ा एयर कनाडा का विमान, कई घायल, न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा


न्यूयॉर्क के व्यस्त ला-गार्डिया (LaGuardia) एयरपोर्ट पर हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने विमान सुरक्षा और रनवे मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉन्ट्रियल से आ रहा एयर कनाडा एक्सप्रेस (Air Canada Express) का एक यात्री विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर खड़े दमकल विभाग के एक ट्रक (Fire Truck) से टकरा गया। इस जोरदार टक्कर के बाद पूरे एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आनन-फानन में सभी उड़ानों को रोक दिया गया।

 

एयर कनाडा एक्सप्रेस की एक फ्लाइट कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर से अपनी नियमित उड़ान पूरी कर न्यूयॉर्क के ला-गार्डिया एयरपोर्ट पर लैंड कर रही थी। विमान रनवे पर अपनी सामान्य गति से उतर रहा था, तभी अचानक सामने दमकल विभाग की गाड़ी आ गई। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट ‘FlightRadar24’ की रिपोर्ट के अनुसार, विमान रनवे पर दौड़ ही रहा था कि उसकी भिड़ंत वहां मौजूद फायर ट्रक से हो गई। इस हादसे की खबर मिलते ही एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत वहां पहुंचे।

 

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विमान को पहुंचा भारी नुकसान

टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्लेन का अगला हिस्सा, जिसे ‘नोज’ कहते हैं, बुरी तरह से दब गया है। सोशल मीडिया पर जो फोटो और वीडियो सामने आए हैं, उनमें साफ दिख रहा है कि प्लेन का मुंह आगे से पिचक गया है। अच्छी बात यह रही कि इतनी बड़ी टक्कर के बाद भी विमान में आग नहीं लगी, वरना यह एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। अभी तक यात्रियों को कितनी चोट आई है, इसकी पूरी जानकारी नहीं मिली है। एम्बुलेंस और मदद करने वाली टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं।

 

 

एयरपोर्ट पर ‘ग्राउंड स्टॉप’ और उड़ानों का चक्का जाम

हादसे की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने तुरंत एक्शन लिया और पूरे ला-गार्डिया एयरपोर्ट पर ‘ग्राउंड स्टॉप’ घोषित कर दिया। इसका सीधा मतलब यह था कि जब तक रनवे साफ नहीं हो जाता और स्थिति काबू में नहीं आती, तब तक न तो कोई विमान वहां लैंड कर सकता था और न ही कोई उड़ान भर सकता था। शुरुआत में यह पाबंदी कुछ घंटों के लिए थी। लेकिन बाद में इसे शाम तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए और कई घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें या तो रद्द कर दी गईं या उनका रास्ता बदल दिया गया।

 

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अब आगे की कार्रवाई क्या है?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक विमान लैंड कर रहा था, तो रनवे के उस संवेदनशील हिस्से पर फायर ट्रक क्या कर रहा था? क्या यह एटीसी (Air Traffic Control) की गलती थी या ट्रक ड्राइवर और पायलट के बीच तालमेल की कमी? FAA और न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एयर कनाडा से भी इस बारे में जवाब मांगा गया है कि क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी जिसकी वजह से वह ट्रक से नहीं बच पाया। फिलहाल पूरे रनवे की सुरक्षा जांच की जा रही है ताकि आने वाले समय में ऐसी जानलेवा गलतियां दोबारा न हों।

‘दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई, परीक्षा की घड़ी’, ईरान संकट पर राज्यसभा में PM


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी ईरान संकट पर अपना पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर युद्ध लंबे समय तक खिंचता है तो स्थितियां गंभीर होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है देश ऐसे संकटों का सामना कर सके, इसके लिए 11 वर्षों में लगातार निर्णय लिए गए हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि होर्मुज से जहाजों का आना चुनौतीपूर्ण है। भारत, संवाद कर रहा है। बातचीत के जरिए समाधान की ओर भारत आगे बढ़ रहा है। होर्मुज से गैस, तेल और उर्वरक आता है, इसलिए होर्मुज का बंद होना, हमें भी प्रभावित कर रहा है। 

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‘दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट’

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू हुए 3 हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं। युद्ध की वजह से दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता की बात है। युद्ध की वजह से हमारे ट्रेड रूट पर असर पड़ा है। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइज़र की रेगुलर सप्लाई पर असर पड़ा है।’

 

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है। तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। 

‘भारत के लिए स्थिति चिंताजनक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है।’

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‘खाड़ी के देशों के साथ संपर्क में है भारत’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर में फोन पर बात की है। हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं।’

‘शांति बहाली ही हमारा मकसद’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है।’

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‘खाड़ी के देशों में फंसे हैं कई हिंदुस्तानी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं। उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति एवं संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।’

किचन के ये 5 मसाले बन सकते हैं साइलेंट किलर, आज ही संभल जाएं


किचन के मसाले खाने का स्वाद तो बढ़ाते हैं लेकिन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के सीईओ सुधांशु पंत और कई लैब रिपोर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इनमें होने वाली मिलावट इन्हें ‘साइलेंट किलर’ बना रही है। हाल ही में जब हॉन्गकॉन्ग के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी (CFS) ने भारतीय मसालों में जहरीले ‘एथिलीन ऑक्साइड’ की पुष्टि की, तो पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। 

 

इसके बाद स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया के को-ऑर्डिनेटर एस. कन्नन ने भी साफ किया कि मसालों की टेस्टिंग अब और कड़ी की जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. फ्रांसिस्को ब्रंका का कहना है कि मसालों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर के अंदरूनी अंगों में सूजन पैदा कर देता है। डेटा बताता है कि बाजार में मिलने वाले करीब 15 से 20 प्रतिशत खुले मसालों में कैंसर पैदा करने वाले केमिकल मिल रहे हैं। अब मसालों की शुद्धता चेक करना केवल शौक नहीं, बल्कि आपकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

 

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हल्दी में लेड क्रोमेट और दिमाग पर खतरा

हल्दी को पीला दिखाने के लिए इसमें ‘लेड क्रोमेट’ मिलाया जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ता डॉ.एमी सोटा की रिसर्च के मुताबिक, लेड यानी सीसा शरीर के नर्वस सिस्टम के लिए जहर जैसा है। यह बच्चों के दिमाग के विकास को रोकता है और बड़ों में  याददाश्त खत्म करने वाली ‘अल्जाइमर’ बीमारी का खतरा बढ़ा देता है। साथ ही, ज्यादा हल्दी शरीर में खून की कमी (एनीमिया) भी कर सकती है क्योंकि यह आयरन को शरीर में घुलने नहीं देती।

लाल मिर्च और कैंसर पैदा करने वाला जहर

लाल मिर्च में अक्सर ‘एथिलीन ऑक्साइड’ पाया जा रहा है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की डॉक्टर मैरी शुबाउर-बेरिगन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह केमिकल सीधा कैंसर पैदा करता है। मिलावटी लाल मिर्च का सेवन करने से पेट के अंदर की परत जलने लगती है। जिससे लंबे समय में पेट का कैंसर या किडनी खराब होने का डर रहता है। आसान भाषा में कहें तो यह मिर्च आपके पेट को अंदर से खोखला कर देती है।

दालचीनी और लिवर फेलियर का डर

बाजार में असली दालचीनी की जगह ‘कैसिया’ बेची जाती है। जर्मन फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर रिस्क असेसमेंट (BfR) के डायरेक्टर डॉ.एंड्रियास हेंसल ने चेतावनी दी है कि कैसिया में ‘कूमरिन’ की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह कूमरिन सीधे लिवर पर हमला करता है। जो लोग रोज काढ़ा या दालचीनी का पानी ज्यादा पीते है, उनके लिवर में घाव होने और लिवर फेल होने की खबरें लगातार बढ़ रही हैं। 

काली मिर्च और पपीते के बीजों का नुकसान

काली मिर्च में पपीते के बीजों की मिलावट सबसे ज्यादा होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) की सीनियर साइंटिस्ट डॉ.हेमलता के मुताबिक, पपीते के बीजों में मौजूद तत्व पाचन तंत्र को पूरी खराब कर देते हैं। अगर काली मिर्च का बारीक पाउडर गलती से सांस की नली में चला जाए तो यह फेफड़ों में गंभीर जलन और सांस फूलने की समस्या पैदा कर सकता है, जो बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक है।

 

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जायफल और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर

जायफल में ‘मिरिस्टिसिन’ नाम का तत्व होता है। मेडिकल टॉक्सिकोलॉजिस्ट डॉ.लियोन ग्रुएनबाम की रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि अगर कोई इंसान एक बार में 6 ग्राम से ज्यादा जायफल खा ले, तो उसे अजीब चीजें दिखती हैं और बेहोशी आने लगती है। यह हमारे नर्वस सिस्टम पर दबाव डालता है और दिल की धड़कन को इतना तेज कर सकता है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक तक आ जाए।

पापमोचनी एकादशी के दिन कौन-सी कथा पढ़नी चाहिए, जान लीजिए


हिंदू धर्म में पापमोचनी एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के सभी रूपों का पूजन किया जाता है। पापमोचनी एकादशी का दिन बेहद खास माना जाता है, जो साल में एक ही बार आता है। पापमोचनी के दिन अक्सर लोग व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पापमोचनी व्रत रखने वाला व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है। इस दिन व्रत रखने से लोगों को मन की शांति मिलती है। यह व्रत तभी सफल माना जाता है जब व्रत रखने वाला व्यक्ति पापमोचनी व्रत की कथा पढ़े या सुने। अगर कोई जातक इस दिन व्रत नहीं रखता है तो माना जाता है कि व्रत रखने के बावजूद उसे व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। इसलिए व्रत की कथा सुनना बेहद जरूरी है।


हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र महीने में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। इस बार पापमोचनी एकादशी 15 मार्च से शुरू होकर 16 मार्च की सुबह तक रहने वाली है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत में पूजा-पाठ के साथ-साथ कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। धार्मिक मान्यता के हिसाब से यह व्रत कथा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को सुनाई थी, यही कथा हमें पढ़नी चाहिए। अब सवाल उठता है कि पापमोचनी व्रत की कथा क्या है।

 

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पापमोचनी व्रत कथा


कथा के अनुसार प्राचीन काल में चैत्ररथ नाम का एक सुंदर वन था। उस वन के आसपास रहने से हमेशा वसंत ऋतु का आनंद मिलता था। वन में हर मौसम में रंग-बिरंगे फूल खिलते थे। इसी वन के पास बैठकर एक ऋषि तपस्या किया करते थे, जो भगवान शिव के भक्त थे और गहरी साधना में हमेशा लीन रहते थे। एक दिन गंधर्वों के राजा चित्ररथ अपनी कई अप्सराओं के साथ उस वन के पास पहुँच जाते हैं।

 

उन अप्सराओं में एक अप्सरा का नाम मंजुघोषा था, जिसकी नजर मेधावी ऋषि पर पड़ती है। मंजुघोषा ने अपनी सुंदरता और मधुर संगीत के जरिए ऋषि को आकर्षित करने का निश्चय किया। वह ऋषि से कुछ दूरी पर बैठकर वीणा बजाने लगी और मधुर गीत गाने लगी। उसी वक्त कामदेव ने भी उसे ऋषि को मोहित करने में सहायता की। धीरे-धीरे मंजुघोषा के संगीत और रूप को देखकर ऋषि मेधावी का मन विचलित हो जाता है। वह अपनी तपस्या भूल जाते हैं और उसके साथ रहने लगते हैं। फिर समय बीतता गया और उन्हें इसका एहसास भी नहीं हुआ।

 

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लंबे समय बाद मंजुघोषा ऋषि मेधावी से स्वर्ग लौटने की इजाजत मांगती है। तब जाकर ऋषि को एहसास होता है कि 57 वर्ष बीत चुके हैं। यह जानकर उन्हें बहुत क्रोध आता है। उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दे दिया कि वह पिशाचिनी बन जाएगी। श्राप सुनकर मंजुघोषा बहुत दुखी हो जाती है और ऋषि से क्षमा मांगने की कोशिश करती है। उसने कई बार विनती की कि उसे इस श्राप से मुक्त होने का कोई उपाय बताया जाए। कुछ देर बाद ऋषि मेधावी का क्रोध शांत होता है। फिर उन्होंने कहा कि अगर वह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का व्रत रखेगी तो उसे इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी।

 

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा से यह व्रत रखता है और इसकी कथा सुनता है, उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं और अनजाने में किए गए पापों से भी व्यक्ति को मुक्ति मिल जाती है।

अमेरिका को सिर पर बिठाया, ईरान से पंगा, खाड़ी के देशों की मजबूरी क्या है ?

गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) के देश इन दिनों जंग की आग में झुलस रहे हैं। इन देशों में आपसी लड़ाई नहीं है। न ही यहां गृह युद्ध की स्थिति है। तेल का कारोबार अच्छा चल रहा है, कमाई तगड़ी है, सीमाई विवाद नहीं है, पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी नहीं हैं, फिर भी जंग की लपट में इन्हें जलना पड़ रहा है। ईरान, इन देशों के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले कर रहा है, यहां मौजूद अमेरिकी ठिकाने तबाह हो रहे हैं। जिस संकट की आग में ये लोग झुलसे हैं, उसके जिम्मेदार भी, यही देश हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के 6 सदस्य देश हैं। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)। ये देश, फारस की खाड़ी के पास बसे हैं। इन देशों के पास अपनी समृद्ध तेल और गैस संपदा है। 

यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम उत्पादन का लगभग 23 से 30 फीसदी हिस्सा उत्पादित होता है। इन देशों से हर दिन 1.7 करोड़ बैरल से ज्यादा उत्पादित होता है, दुनिया के कुल कच्चे तेल के भंडार का करीब आधा हिस्सा इनके पास है। समृद्धियों के ढेर पर बैठे होने के बाद भी ये देश अशांत हैं। पड़ोसियों से इन देशों की कभी नहीं बनी। आपस में अतीत में भिड़ते रहे हैं। पड़ोसियों पर इनका भरोसा कम है, अमेरिका पर ज्यादा है। अमेरिका पर ही इन्हें अशांत रखने के आरोप भी लगते रहे हैं। 

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खाड़ी के देशों की ईरान से बनती क्यों नहीं है?

ईरान ने 9 देशों पर हमला किया है, जहां बड़े पैमाने पर उन्हें नुकसान पहुंचा है। इन देशों में बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईराक, जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं। ये देश, ईरान से नजदीक हैं, कुछ देश इनमें से ईरान के पड़ोसी भी हैं, फिर भी ईरान उन्हें नहीं बख्शता है। वजह यह है कि इन देशों से ही ईरान पर हमले होते हैं। इजरायल और अमेरिका, इन देशों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं, ईरान को यह बर्दाश्त नहीं होता है। इन देशों के सामरिक हित भी टकराते हैं। 80 के दशक से ही ऐसी स्थिति है। 

कहां-कहां हैं अमेरिकी सैन्य बेस?

  • कतर: 10 हजार सैनिकों के साथ अल उदीद एयर बेस, यहां का सबसे बड़ा अमेरिकी एयर बेस है। कतर पर भी ईरान ने हमले किए हैं। 
  • बहरीन: नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन, अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है। बहरीन को भी ईरान ने निशाना बनाया है। 
  • कुवैत: कैंप अरिफजान और अली अल-सालेम एयर बेस यहां हैं। अमेरिकी रसद और टैंकों के विशाल भंडार यही हैं। कुवैत पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। 
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): अल धफरा एयरबेस पर अमेरिकी फाइटर जेट और सर्विलांस ड्रोन तैनात हैं। यहां भी ईरान ने हमला किया है। 
  • सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयर बेस, अमेरिका के लिए बेहद खास है। यहां अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम है, पैट्रियल मिसाइलें तैनात है। यहां भी ईरान ने हमले किए हैं। यहां की कई रिफ्यूलिंग प्लेन, ईरान ने तबाह कर दिया। 
  • ओमान: अमेरिका ने यहां अपने सैन्य ठिकाने नहीं बनाए  हैं लेकिन यहां के एयर बेस को इस्तेमाल करने की इजाजत अमेरिकी सेना को है। साल 1980 में अमेरिका के साथ एक रक्षा समझौता हुआ था। यहां डुक्म बंदरगाह, सलालाह बंदरगाह, थुमराईत और मसीराह एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिका कर सकता है। ओमान पर भी ईरान ने हमला किया है। यहां समुद्री टैंकर को ही ईरान ने तबाह कर दिया था। 
नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन।

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पश्चिम एशिया के दूसरे देशों में है अमेरिकी मौजूदगी 

  • इराक: ऐन अल-असद और एरबिल एयर बेस अमेरिका ने यहां बनाया है। यहां ISIS के खिलाफ अभियान और प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। ईरान ने यहां भी धावा बोला है। 
  • जॉर्डन: अमेरिका के पास इस देश में मुवाफ्फक अल-साल्टी एयर बेस है। यहां से ईरान पर हमले कर सकता है। ईरान ने खतरा भांपते हुए यहां भी मिसाइलें दागी हैं।
  • सीरिया: सीरिया में भी कट्टरपंथी ताकतों से निपटने के लिए अल तनफ बेस पर अमेरिकी जवान मौजूद रहते हैं। ईरान ने सीरिया में भी मिसाइलें दागी हैं। 
  • तुर्की: इंजिलिक एयरबेस में अमेरिकी मौजूदगी है। साल 1955 से ही यहां अमेरिका है। तुर्की, नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन का हिस्सा है। अमेरिकी एयरफोर्स की 39वीं विंग यहां मौजूद है। 
अल उदीद एयर बेस।

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‘पश्चिम’ को सिर पर क्यों बिठाते हैं खाड़ी के देश?

दीवान लॉ कॉलेज में इंटरनेशनल स्टडी पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ‘खाड़ी के देश, ईरान पर भरोसा कर नहीं पाते हैं। ईरान के साथ उनके हितों का टकराव है। खाड़ी के ज्यादातर देश, पूरी तरह से व्यापार पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में हमेशा अस्थिरता रही है, जिसे उन्हें ईरान नहीं निकाल सकता है। उन्हें सुरक्षा के लिए अमेरिकी मदद पर निर्भर रहना ही पड़ाता है। इन देशों की सेनाएं कमजोर भी हैं। सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर हैं। 

GCC की विदेश नीति, उनके अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। खाड़ी देशों के पास अकूत संपत्ति है लेकिन सेना नहीं। रक्षा के लिए अमेरिकी निर्भरता मजबूरी है। ईरान, खुद टकराव में है। इजरायल के साथ लंबा संघर्ष रहा है। 80 के दशक से ही ईरान, इजरायल को खतरे के तौर पर देख रहा है। 

सउदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, डोनाल्ड ट्रंप के साथ।

खाड़ी के देश, ईरान को वैचारिक और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते हैं। ये देश, सुन्नी बाहुल हैं, ईरान में शिया ज्यादा हैं, दोनों के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक टकराव भी रहे हैं। ईरान, अगर परमाणु बम बनाएगा तो इन देशों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा। अमेरिका, जिसे खतरा मानता है, ये देश, उसे भी खतरा मानते हैं। अमेरिका, इन देशों को सुरक्षा देता है। अमेरिका, यहां क्षेत्रीय सुरक्षा बनाने का भी काम करता है।  

खाड़ी के देशों के सबसे बड़े खरीदार भी अमेरिका और पश्चिमी देश रहे हैं। खाड़ी के देश, अब रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी रिश्ते दुरुस्त कर रहे हैं। नए हमलों के बाद, ईरान के साथ ऐसे संबंधों की उम्मीद भी बेमानी लग रही है। ईरान के साथ रिश्ते और बिगड़ने वाले हैं। अब खाड़ी के देश भी ईरान के हमलों का जवाब देने वाले हैं।