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ईरान को मिल गया अली लारीजानी का उत्तराधिकारी, सामने चुनौतियां कौन-कौन सी?


अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच ईरान को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नया मुखिया मिल गया है। 17 मार्च को अली लारीजानी की मौत के बाद से यह पद खाली था। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बगेर जोलघाद्र को राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1979 में इस्लामी क्रांति हुई। इसके बाद आईआरजीसी का गठन हुआ। जोलघाद्र तब से आईआरजीसी से जुड़े हैं। सैन्य और सुरक्षा मामलों का गहरा अनुभव रखते हैं। जोलघाद्र ने आठ साल आईआरजीसी ज्वाइंट स्टाफ के तौर पर अपनी सेवा दी। आठ साल तक डिप्टी कमांडर इन चीफ रहे। 2023 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सचिव बनाया गया।

अली लारीजानी की मौत के बाद ईरान के शासन व्यवस्था में बड़ा शून्य पैदा हो गया था। युद्ध के बीच ईरान को एक ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे शासन प्रशान के अलावा सैन्य मामलों की भी गहरी समझ हो। उसकी यह तलाश मोहम्मद बगेर जोलघाद्र के तौर पर पूरी हुई। उनके पास इराक के साथ युद्ध लड़ने का भी अनुभव है।

जोलघाद्र की सामने चुनौतियां क्या?

  • माना जाता है कि अली लारीजानी की तुलना में जोलघाद्र के पास सैन्य मामलों की अच्छी समझ है। मगर उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। अली लारीजानी जहां एक तरफ अमेरिका के खिलाफ बयानबाजी करते थे तो वहीं दूसरी तरफ बातचीत के पक्षधर थे। हाल ही हुई परमाणु वार्ता अली लारीजानी की कोशिश का ही नतीजा थी। अगर जोलघाद्र कूटनीति की जगह सैन्य हस्तक्षेप को अधिक महत्व देते हैं तो यह युद्ध और आगे खिंच सकता है।

  • साल की शुरुआत में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद ईरान में बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा जा रहा है। इन पर विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का आरोप है। वहीं इराक सीमा के नजदीक हमले हो रहे हैं। पश्चिम अजरबैजान प्रांत तक को निशाना बनाया जा रहा है। यह इलाका कुर्दों का है। अमेरिका और इजरायल की पूरी कोशिश यहां ईरानी सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काना है। ऐसे में बाहरी हमलों के बावजूद जोलघद्र के सामने आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का परिचालन सामान्य होगा या नहीं, यह अब जोलघाद्र के रुख पर निर्भर करेगा। खाड़ी देशों के खिलाफ हमले की प्रकृति भी वह ही तय करेंगे। अगर अमेरिका के साथ कोई बातचीत होती है तो उसमें भी जोलघाद्र की भूमिका अहम होगी।

चंदा नहीं दिया तो काटी बिजली, 2 साल से अंधेरे में घर, HC ने क्या फैसला सुनाया?


ओडिशा हाई कोर्ट में एक बिजली कनेक्शन का ऐसा मुद्दा पहुंचा, जिसे स्थानीय स्तर पर ही निपटाया जा सकता था। एक शख्स, बिजली कनेक्शन कटने से इतना प्रताड़ित हुआ कि उसे मजबूरी में हाई कोर्ट में अर्जी दायर करनी पड़ी।

भद्रक जिले के बालासोर में एक शख्स के घर की बिजली गांव वालों ने काट दी। शख्स ने दुर्गा पूजा के लिए चंदा में 5000 रुपये नहीं दे पाया था। ओडिशा हाईकोर्ट ने इस मामले में गांव वालों को फटकारा और बिजली सुविधाएं बहाल करने का तत्काल निर्देश दिया।

जस्टिस सावित्री राठो ने कहा कि बिजली एक बुनियादी सुविधा है, जिसे किसी को भी नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि दो हफ्तों के अंदर बिजली कनेक्शन बहाल कराया जाए। कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से इस विवाद का हल निकाला जाए।

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कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सावित्री राठो ने 20 मार्च को सुनवाई के दौरान कहा कि बिजली बुनियादी जरूरत है। गांव वाले बिजली के अधिकारियों को चंदा न चुकाने की वजह से शख्स को बिजली कनेक्शन देने से रोक नहीं सकते हैं। यह गैरकानूनी है। कोर्ट ने साफ कहा कि गांव वाले याचिकाकर्ता दैतारी साहू के घर की बिजली लाइन जोड़ने से बिना किसी वजह के रोक रहे हैं। उन्हें न तो कोई अधिकार है कि वे बिजली बहाल करने से रोकें। सामाजिक दबाव बुनियादी अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकता।

‘2 हफ्ते के भीतर जुड़ेगा कनेक्शन’

बालासोर के एसपी को निर्देश दिया गया है कि पर्याप्त पुलिस बल लेकर गांव जाएं। पुलिस बल में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हों। उनकी तैनाती के दो हफ्तों में बिजली कनेक्शन बहाल कराएं। कोर्ट ने कहा कि एसपी पहले गांव वालों और याचिकाकर्ता के बीच बातचीत के जरिए विवाद हल कराने की कोशिश करना चाहिए, क्योंकि याचिकाकर्ता को गांव में ही रहना है।

दो साल से बिजली के लिए तरस रहा शख्स

दैतारी साहू का घर इंदिरा आवास योजना के तहत बना था। अक्टूबर 2023 में दुर्गा पूजा चंदे के 5000 रुपये न देने पर गांव वालों ने उसकी बिजली काट दी। उसके बाद दो साल से ज्यादा समय से घर बिना बिजली का रहा।

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अधिकारियों की कोशिश बार-बार हुई फेल

सितंबर 2024 में साहू ने बिजली जोड़ने के लिए अर्जी दी। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को विचार करने को कहा। अप्रैल-मई 2025 में इंजीनियर और पुलिस कई बार गांव गए, लेकिन हर बार गांव वालों के विरोध की वजह से लौट आए। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ने पत्र लिखकर बताया कि ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा विरोध किया, हिंसा होने की आशंका में काम नहीं हो पाया और लौटना पड़ा।

190 रुपये जमा करने के बावजूद बिजली नहीं मिली है। दैतारी साहू ने बिजली जोड़ने के 190 रुपये पहले ही जमा कर दिए थे, फिर भी चंदे के दबाव की वजह से बिजली नहीं मिल पाई। ग्रामीण कनेक्शन जोड़ने का बार-बार विरोध किया। हिंसक विरोध के डर से अधिकारी वहां जाने से कतराते रहे।

अब आगे क्या?

हाई कोर्ट में एक और रिट याचिका, 30 मार्च 2026 को सुनवाई के लिए लंबित है। याचिका में बिजली सुविधा बहाल करने की मांग की गई है। अभी स्थानीय स्तर पर ग्रामीण पंचायतें ऐसे फैसले लेती हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि त्योहार के नाम पर कानून की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। बिजली बुनियादी जरूरत है।

पीने के लिए सही नारियल की पहचान कैसे करें? नोट कीजिए, काम आएगी टिप्स


गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीने की सलाह डॉक्टर अक्सर देते हैं लेकिन नारियल पानी पीने का असली मजा तभी है जब उसका स्वाद मीठा हो। नारियल पानी खरीदते वक्त ही कई लोगों को समझ आ जाता है कि कौन सा नारियल का पानी मीठा है।

नारियल पानी पीने से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। नारियल पानी में कैलोरी कम होती है, जिससे यह वजन घटाने में सहायक होता है। अब सवाल उठता है कि नारियल खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि हम हमेशा मीठा नारियल पानी खरीद सकें।

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मीठे नारियल पानी की पहचान कैसे करें?

नारियल खरीदते वक्त कुछ टिप्स अपनानी चाहिए ताकि मीठे नारियल खरीदे जा सकें। नारियल के रंग, आकार और नारियल को हिलाकर पहचाना जा सकता है कि कौन सा नारियल पानी स्वाद में मीठा होगा।


रंग के आधार पर: जिन नारियल का रंग गहरा हरा और हल्का पीला होता है, वे नारियल सबसे बेहतर माने जाते हैं। इन नारियल का पानी अक्सर मीठा होता है। इसलिए हरे और हल्के पीले रंग के नारियल खरीदना बेहतर होता है। इसके बजाय उन नारियल को कभी नहीं खरीदना चाहिए जिन पर दाग-धब्बे हों और जो हल्के ब्राउन रंग के हों। इस तरह के नारियल ज्यादातर पुराने होते हैं और पुराने नारियल का स्वाद मीठा नहीं होता है।

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नारियल को हिलाकर सुनें: नारियल खरीदने का सबसे आसान तरीका है कि उसे हिलाकर सुना जाए। ऐसा करने से हमें पता चल जाएगा कि नारियल के अंदर पानी है या नहीं। जिस नारियल में साफ-साफ पानी की आवाज सुनाई देती है, उसमें ज्यादा मात्रा में पानी होता है। जिस नारियल में ज्यादा पानी होता है, वह नारियल ताजा होता है।

आकार: नारियल के आकार से भी समझा जा सकता है कि कौन सा नारियल अच्छा है। नारियल खरीदते वक्त देखना चाहिए कि नारियल का आकार थोड़ा कोन (नुकीला) और लंबा हो। इस आकार के नारियल में अक्सर ज्यादा पानी होता है। इसके बजाय गोल आकार के नारियल में कम पानी होता है। हालांकि नारियल के आकार से पानी की मिठास का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।

वजन: नारियल खरीदते वक्त उसका वजन भी देखना चाहिए। दो नारियल उठाकर देखें, जो नारियल अपने आकार के हिसाब से भारी होगा, वही लेना सही होगा। भारी नारियल का मतलब है कि उसमें पानी सही मात्रा में है। इससे साफ होता है कि नारियल ताजा है, इसलिए आकार के हिसाब से भारी नारियल लेना चाहिए।

900 से अधिक मंदिरों का पहाड़, लेकिन सूरज ढलते ही क्यों छा जाता सन्नाटा?


गुजरात के पालिताना में स्थित शत्रुंजय पहाड़ी को ‘सिद्धक्षेत्र’ माना जाता है। यहां पत्थरों को तराश कर बनाए गए 863 से लेकर 900 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं। सफेद संगमरमर से बने ये मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना पेश करते हैं। जैन धर्मावलंबियों के लिए यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने तपस्या की थी।

इस पहाड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे ‘देवताओं का शहर’ कहा जाता है। यहां की सीढ़ियां चढ़ना और इन मंदिरों के दर्शन करना मोक्ष का द्वार माना जाता है लेकिन जैसे ही सूरज ढलने लगता है, इस पूरे इलाके का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह पहाड़ शाम होते ही एकदम सुनसान हो जाता है।

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सूरज ढलते ही सन्नाटा क्यों?

शत्रुंजय पहाड़ी पर सूर्यास्त के बाद सन्नाटा छाने के पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है। जैन धर्म में ‘अहिंसा’ को सर्वोपरि माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, रात के समय सूक्ष्म जीव और कीड़े अधिक सक्रिय हो जाते हैं। अंधेरे में अनजाने में भी किसी जीव की हत्या न हो, इसलिए यहां रात में ठहरना सख्त मना है।

नियम और परंपराएं

  • शाम की आरती के बाद सभी पुजारियों और भक्तों को पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है। रात के समय यहां केवल ‘देवताओं का वास’ माना जाता है।
  • इस पवित्र पर्वत पर कुछ भी खाना या साथ ले जाना वर्जित है। भक्त नीचे से ही उपवास रखकर ऊपर जाते हैं।
  • पालिताना को दुनिया का पहला आधिकारिक शाकाहारी शहर घोषित किया गया है, जहां मांस और अंडे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

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प्रमुख मंदिर और वास्तुकला

यहां का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर भगवान आदिनाथ का है। मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी से शुरू हुआ था और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे भव्य बनाया गया। नक्काशी इतनी बारीक है कि इसे देखकर प्राचीन भारतीय शिल्प कौशल की श्रेष्ठता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

पाकिस्तान में सिख छात्रा की पिटाई, जबरन उतारी पगड़ी; जानें पूरा मामला


पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक सिख छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना हुई है। बताया जा रहा है कि वारिसपुरा इलाके के सेंट कैथरीन गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ने वाली इस छात्रा को जबरन ईसाई प्रार्थना में शामिल होने के लिए कहा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा ने जब प्रार्थना में शामिल होने से इनकार किया तो स्कूल के स्टाफ ने उसके साथ मारपीट की और उसकी पगड़ी जबरन उतार दी। सिख धर्म में पगड़ी को सम्मान और आस्था का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस घटना से सिख समुदाय में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।

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मां ने लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित छात्रा की मां ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को पेट में लात-घूंसे मारे गए। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी अस्थमा की मरीज है और घटना के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई थी। जब उसकी बहन मदद के लिए आगे आई तो शिक्षकों ने उसे रोक दिया और कहा कि वह नाटक कर रही है।

घटना के सामने आने के बाद सिख संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल समेत कई संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता की मां ने भी प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

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पहले भी परिवार पर उत्पीड़न के आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता की मां ने दावा किया है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके परिवार को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पहले भी नौ महीने तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उनके साथ मारपीट और यातनाएं दी गईं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे के बाल जबरन काट दिए गए थे जो सिख धर्म में बेहद पवित्र माने जाते हैं।

‘रोको, टोको और ठोको’, गोरक्षा के नाम पर कैसी सेना बना रहे अविमुक्तेश्वरानंद?


 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने वाराणसी में एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि चतुरंगिणी सेना का गठन किया गया है। इसके लिए श्रीशंकराचार्य ने 27 सदस्यीय एक चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। उन्होंने इस सेना के काम करने के तरीके के बारे में बात करते हुए कहा कि रोको टोको और ठोको की तर्ज पर काम करेगी। यह सेना आगे चलकर गोरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल हिंदू समाज में फैले भय को दूर करने और सत्य के साथ खड़े होने का साहस पैदा करने के लिए की जा रही है।

 

इस सेना का ड्रेस कोड पीला वस्त्र और हाथ में परशु होगा।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि चतुरंगिनी सेना में सैनिकों की संख्या 2 लाख 18 हजार के करीब होगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी होगी। इस सेना के पास अस्त्र-शस्त्र भी होंगे।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने कहा कि इस सेना में हर एक सनातनी की भागीदारी होगी। सेना के सैनिक फरसे,लाठी, तलवार और एयर बंदूकों से लैस होंगे, जो साधु-संतों के साथ-साथ सामान्य सनातनी हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा करेगी।

 

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10 महीने में बन जाएगी सेना

 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस सेना का एलान करते हुए बताया कि यह सेना 10 महीने में धरातल पर उतर जाएगी। इसके लिए उन्होंने 2 लाख 18 हजार 700 सदस्य बनाने का टारगेट रखा है। उन्होंने कहा कि 27 सदस्यों वाली चतुरंगिणी सभा अगले 10 महीनों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करती हुई नजर आएगी और लोगों के बीच विश्वास व सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी। 

गौ रक्षा के लिए करेगी काम

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्लान के बारे में बताते हुए कहा कि इस सेना का आगे विस्तार किया जाएगा और यह सेना गौरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि चतुरंगिणी सेना को गौ रक्षा के लिए विस्तारित करने की योजना है। 

टोको, रोको और ठोको पर क्या बोले?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज के समय में हिंदू समाज में कई लोग भय के कारण सच का साथ नहीं दे पाते और मजबूरी में गलत का समर्थन करने लगते हैं। ऐसे में चतुरंगिनी सेना का मुख्य उद्देश्य निर्बलों का बल बनना और समाज में न्याय स्थापित करना होगा। उन्होंने बताया कि संगठन के काम करेने का तरीका ‘टोको, रोको और ठोको होगा।’ हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले किसी गलत काम को टोका जाएगा और फिर उसको रोकने की कोशिश की जाएगी। अगर फिर भी कोई गलत काम करेगा तो उसे ठोका जाएगा और ठोकने का मतलब उसे मारना नहीं है। उन्होंने कहा कि ठोकने का मतलब उसकी शिकायत करना और कानूनी कार्रवाई करना है। 

 

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फरसे को लेकर क्या बोले?

फरसा को लेकर जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह भगवान परशुराम जी ने धारण किया था। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने पहले वेदों का अध्ययन किया और पपस्या में जीवन बिताया। उनके आश्रम में गाये थीं और जब सहस्त्रार्जुन नामक राजा ने उन पर आक्रमण कर गायों को कष्ट पहुंचाया, तब उन्होंने उनकी रतक्षा के लिए फरसा धारण किया। 

7 से 8 घंटे की नींद के बाद भी क्यों महसूस होती है थकान?


हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे तक सोना चाहिए। नियमित मात्रा में नींद लेने से शरीर स्वस्थ रहता है। कई लोग इस सलाह को मानते हैं कि इसके बावजूद थका हुआ महसूस करते हैं। आलर्म बजते ही हम उठ तो जाते हैं लेकिन दिमाग सुस्त महसूस करता है। ऐसा लगता है कि शरीर को बिल्कुल भी आराम नहीं मिला है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं। नींद की गुणवत्ता का हमारा सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि कारणों से नींद पर प्रभाव पड़ता है।

 

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 क्यों महसूस होती है थकान?

थायराइड इंबैलेंस

 

थायराइड ग्लैंड हमारे गले में पाया जाता है जो शरीर में एनर्जी को बनाएं रखने में मदद करता है। जब थायराइड एक्टिव नहीं होता है तो उसे हाइपोथायरडिज्म कहा जाता है। इस दौरान शरीर में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है।

 

लक्षण

  • लगातार थकान
  • एकदम से वजन बढ़ना
  • ठंडक महसूस होना

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक हाइपोथायराडिज्म शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और पर्याप्त नींद के बाद भी थकान महसूस होती है।

विटामिन की कमी

विटामिन की कमी की वजह से भी शरीर में एनर्जी महसूस नहीं होती है। जब शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी होती है तब शरीर भोजन का इस्तेमाल एनर्जी बनाने के लिए करता है।

 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन डी की कमी
आयरन की कमी

 

विटामिन बी12 रेड ब्लड सेल्स को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में खून की कमी के कारण ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नसों में नहीं पहुंचेगा। इस वजह से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। विटामिन डी की कमी की वजह से इम्यून फंक्शन भी प्रभावित होता है। इसकी कमी के कारण थकान महसूस होती है। 

 

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तनाव बढ़ना

नींद की कमी सिर्फ शरीर को ही नहीं दिमाग को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है तो दिमाग नींद के दौरान भी सतर्क रहता है। शरीर शारीरिक रूप से आराम कर सकता है लेकिन मन चिंताओं और तनाव से भरा रहता है। अधिक तनाव की वजह से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ता है।

इन आदतों से नींद पर पड़ता है प्रभाव

  • रात को देर तक फोन चलाना।
  • रात को अधिक खाना खा लेना।
  • अनियमिक स्लीप शेड्यूल
  • अधिक मात्रा में कॉफी पीना

नींद को कैसे बेहतर करें?

  • टाइम से सोना। 
  • रात को सोने से आधे घंटे पहले फोन बंद कर दें।
  • सुबह उठकर नियमित मात्रा में एक्सरसाइज करें।
  • रात को कॉफी या चाय का सेवन करने से बचें।

18 या 19, कब से शुरू हो रही है नवरात्रि? सही तारीख जान लीजिए


अगर आप चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तारीख को लेकर परेशान हैं तो अब सारा भ्रम दूर कर लीजिए। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होने जा रही है। खास बात यह है कि इसी दिन से हिंदू कैलेंडर का नया साल (विक्रम संवत 2083) भी शुरू होगा। होली बीतते ही लोग अब माता रानी के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का सबसे बड़ा महत्व है और माना जाता है कि अगर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए, तो माता रानी की विशेष कृपा मिलती है।

 

नवरात्रि का पहले दिन कलश स्थापना, सबसे अहम है। इसे आसान भाषा में मां दुर्गा को अपने घर बुलाने का तरीका माना जाता है। इस बार 19 मार्च को कलश रखने के लिए दो अच्छे समय हैं। सुबह का मुहूर्त 6:11 बजे से 8:35 बजे तक है। अगर आप सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पाते है, तो दोपहर में ‘अभिजीत मुहूर्त’ सबसे बढ़िया है। इसका समय 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। नवरात्रि की पहली तिथि 18 मार्च की रात 9:34 बजे से शुरू होगी और 19 मार्च की रात 10:15 बजे खत्म होगी।

 

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कलश स्थापना क्यों की जाती है?

कलश स्थापना नवरात्रि का सबसे जरूरी हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को पूरे ब्रह्मांड का रुप माना जाता है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसे स्थापित करने का अर्थ है मां दुर्गा का अपने घर में आदर के साथ स्वागत करना और उन्हें नौ दिनों तक विराजमान होने की प्रार्थना करना। कलश को सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रखना चाहिए।

पालकी पर बैठकर आएंगी मां दुर्गा

हर बार की तरह इस बार भी लोग जानना चाहते हैं कि माता रानी किस सवारी पर आएंगी। क्योंकि इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा ‘पालकी'(डोली) पर बैठकर आ रही हैं। ज्योतिष के अनुसार, पालकी पर आना खुशहाली तो लगता ही है, साथ ही यह शांति और सावधानी से काम लेने का इशारा भी है। वहीं जब नवरात्रि खत्म होगी, तो मां ‘हाथी’ पर सवार होकर विदा होंगी। हाथी पर विदाई को अच्छी बारिश और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।

 

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पूजा के वक्त इन बातों का रखें ध्यान 

शास्त्रों की मानें तो कलश हमेशा शुभ समय देखकर ही बैठना चाहिए। पूजा करते समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग जैसे समय का ध्यान रखें और इनसे बचें। कलश को पूरे संसार का रुप माना जाता है जिसमें सारे देवी-देवता बसते है। इसलिए इसे पूरी सफाई और नियम के साथ स्थापित करें। चैत्र महीने की ये नवरात्रि न सिर्फ भक्ति का पर्व है, बल्कि यह नए साल की नई शुरुआत का भी संदेश देती है।

ईरान में जंग, खाड़ी पर असर, बढ़ रहा LPG संकट, किसके पास कितना स्टॉक?


मिडिल ईस्ट में ईरान,इजरायल और अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बाधित होने का असर अब दक्षिण एशिया के देशों में LPG और ईंधन संकट के रूप में दिखने लगा है। भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान और पाकिस्तान जैसे देश मिडिल ईस्ट से तेल और LPG आयात पर निर्भर हैं। इसलिए सप्लाई बाधित होते ही इन देशों में गैस स्टॉक तेजी से घटने लगा है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई होती है और इसके बाधित होने से एशिया के आयातक देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। कई देशों ने ईंधन बचाने के लिए स्कूल बंद, वर्क फ्रॉम होम, गैस राशनिंग और पावर कट जैसे कदम उठाए हैं।

 

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भारत की स्थिति

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल LPG मांग का लगभग 55-60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से अधिकांश सऊदी अरब, कतर और UAE से आता है। द गार्डियन में दिल्ली स्थित थिंक टैंक ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स के अख्तर मलिक ने बातया कि भारत ने रणनीतिक कच्चे तेल के भंडार तो बनाए लेकिन LPG के लिए वैसे बफर नहीं बनाए। उन्होंने आगे कहा, ‘वैश्विक स्तर पर, ऊर्जा प्रणालियां आमतौर पर जरूरी ईंधनों के लिए 40 से 60 दिनों का रिजर्व कवर रखती हैं। इसके विपरीत, भारत के पास LPG का भंडारण 20 दिनों से कुछ ही ज़्यादा है, मौजूदा संकट जितना सप्लाई में रुकावट की वजह से है, उतना ही योजना बनाने में कमी की वजह से भी है।’

पड़ोसी देशों में हाहाकार

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपे एक रिपोर्ट के मुताबकि पाकिस्तान में नौ दिनों के लिए LPG और 14 दिनों के लिए जेट ईंधन बचे हैं। द मोर्निंद में छपे एक रिपोर्ट में बताया गया कि श्रीलंका में प्रतिदिन 1,000-1,200 मीट्रिक टन LPG की मांग है, लेकिन भंडारण क्षमता केवल एक सप्ताह की आपूर्ति के बराबर है। लिट्रो गैस लंका के चेयरमैन गुणवर्धना ने बताया कि श्रीलंका को हर दो दिन में 8,000 मीट्रिक टन की खेप मालदीव में खड़े बड़े LPG पोत से छोटे जहाजों में लानी पड़ रही है।

 

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कई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि बांग्लादेश के पास कुछ हफ्तों का LPG स्टॉक है। नेपाल LPG के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है, इसलिए अब उसके पास LPG की सप्लाई सीमित है। LPG कमी के कारण नेपाल ने राशनिंग शुरू कर दी है। भूटान भी पूरी तरह से LPG के लिए भारत पर निर्भर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक भूटान भारत के साथ MoU के कारण सप्लाई जारी, पर कीमतों में भारी उछाल। भूटान में भी कुछ हफ्तों का ही LPG स्टॉक है।

कई देशों में स्कूल बंद, वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीलंका में ईंधन और गैस स्टॉक बचाने के लिए 4 दिन का वर्क वीक लागू किया गया है और ईंधन राशनिंग भी की जा रही है। बांग्लादेश में यूनिवर्सिटी बंद कर दी गई हैं और सजावट वाली लाइटों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। पाकिस्तान में लों की छुट्टी कर दी गई है और लोगों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को कहा गया है ताकि पेट्रोल-डीजल बचाया जा सके। नेपाल में आधा भरा हुआ’ सिलेंडर बांट रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गैस पहुंच सके।

महिलाओं के लिए 273 सीटें, UP-बिहार से 180 MP, लोकसभा में क्या-क्या बदलेगा?


संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। अब चर्चा तेज हो गई है कि महिलाओं के लिए संसद में एक तिहाई आरक्षण लागू करवाने के लिए इसी सत्र में बिल लाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और लोकसभा सांसदों की कुल संख्या 816 हो जाएगी। नए फॉर्मूले के मुताबिक, हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। उत्तर प्रदेश में फिलहाल लोकसभा की 80 सीटें हैं और ये बढ़कर 120 हो सकती हैं। इसी तरह बिहार में जो 40 सीटें हैं वे बढ़कर 120 हो जाएंगी। दक्षिण के राज्यों की चिंता भी खत्म हो सकती है क्योंकि वहां भी सीटों की संख्या इसी अनुपात में बढ़ेगी।

 

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम सहमति पर पहुंचने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। सूत्रों ने बताया कि यदि आम सहमति बन जाती है तो दोनों विधेयक इसी सप्ताह पेश किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में शामिल होने वाले विपक्षी नेताओं में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पी वी मिधुन रेड्डी, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मनोज झा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM)असदुद्दीन ओवैसी के शामिल थे। अमित शाह आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।

 

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कहां, कितनी सीटें बढ़ेंगी?

 

फिलहाल, अनुमान के आधार पर ही सीटों की संख्या बताई गई है लेकिन माना जा रहा है कि यही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। इस फॉर्मूले के तहत हर राज्य में सीटों की संख्या मौजूदा संख्या से डेढ़ गुना ज्यादा हो सकती है। इसी अनुपात में दक्षिण भारत के राज्यों में भी इजाफा हो सकता है। आंध्र प्रदेश में अभी 25 सीटे हैं जो बढ़कर 38 हो सकती हैं। इसी तरह तेलंगाना में 17 से 26, तमिलनाडु से 39 से 59, केरल में 20 से 30, कर्नाटक में 28 से 42 और ओडिशा में 21 से 32 सीटें हो गई जाएंगी।

 

इसी तरह उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120, बिहार में 40 से बढ़कर 60, पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 63 और राजस्थान में 25 से बढ़कर 38 सीटें हो सकती हैं। दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेश में सीटें स्थिर रहेंगी। दिल्ली में 7  से बढ़कर 11 लोकसभा सीटें हो सकती हैं।


कब  से लागू होगा आरक्षण?

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा। मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के साथ वर्टिकल बेस पर किया जाएगा। राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जहां सीटों का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।

 

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कहा जा रहा है कि संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम में भी बदलाव करेगा। वहीं, दूसरी ओर एक अन्य साधारण विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा। संसद से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू हो जाएंगे और लोकसभा के अलावा ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में सीट के आरक्षण में मदद करेंगे। सूत्रों ने बताया कि परिसीमन या सीमा आयोग एक ‘निष्पक्ष’ निकाय है जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसके फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

कितने साल के लिए होगा महिला आरक्षण?

 

एक सरकारी पदाधिकारी ने बताया, ‘ज्यादा से ज्यादा यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।’ परिसीमन प्रक्रिया के अलावा, उन निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है जिन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना है, जैसा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है। इस प्रकार निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण का निर्धारण करने का एक अन्य तरीका ‘रोटेशन’ प्रक्रिया हो सकती है। सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है।

 

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यह अधिनियम अब तक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है। महिला आरक्षण विधेयक पारित कराते समय सरकार ने कहा था कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन प्रक्रिया से महिलाओं के लिए आरक्षित की जाने वाली विशेष सीटों का पता चल जाएगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण 15 वर्षों तक जारी रहेगा और संसद बाद में इस लाभ की अवधि को बढ़ा सकती है।